उद्योग संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव मेमानी ने GST व्यवस्था में बड़े सुधार की वकालत की है। उन्होंने कहा कि आम लोगों और उद्योगों के लिए इसे अधिक कारगर और सरल बनाने की ज़रूरत है।
CII की सिफारिश है कि वर्तमान 5 टैक्स स्लैब की जगह सिर्फ 3 स्लैब होने चाहिए:
5%: आवश्यक वस्तुओं (Essential Items) पर
28%: लक्ज़री और सिन गुड्स पर
12-18% के बीच एक सिंगल रेट: बाकी सभी सामान्य वस्तुओं के लिए
राजीव मेमानी ने कहा कि आवश्यक चीजों पर टैक्स कम होना चाहिए और उन्हें निचले टैक्स स्लैब में रखा जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली GST काउंसिल बैठक में रेट में बदलाव की दिशा में फैसला हो सकता है। उनका मानना है कि जब तक देश की गरीब आबादी के हाथ में ज़्यादा पैसा नहीं आएगा, आर्थिक विकास दर टिकाऊ (sustainable) नहीं बन पाएगी।
सीमेंट पर टैक्स कम करने की मांग
CII ने सीमेंट पर भी GST दर घटाने की वकालत की है। फिलहाल यह 28% स्लैब में है। दर घटने से सीमेंट सस्ता होगा और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में रफ्तार आएगी।
पेट्रोलियम और बिजली को GST में लाने की जरूरत
मेमानी ने यह भी कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों और बिजली को GST के तहत लाने पर राष्ट्रीय सहमति (political consensus) बनाना होगा। इसके लिए राज्यों और केंद्र सरकार को मिलकर फैसला करना होगा।
CII का मानना है कि GST 2.0 की दिशा में टैक्स स्लैब्स का सरलीकरण, आवश्यक वस्तुओं पर दरों में कटौती, और कुछ प्रमुख सेक्टर्स को GST में शामिल करना जरूरी है ताकि कर व्यवस्था सरल हो और आर्थिक विकास को गति मिले।
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