ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ

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अमेरिका ने ईरान को कूटनीतिक और आर्थिक रूप से चारों ओर से घेरना शुरू कर दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। ट्रंप के इस फैसले से ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों पर की जा रही हिंसक कार्रवाई को लेकर खामेनेई सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ गया है। मानवाधिकार समूहों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 648 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

ट्रंप का यह टैरिफ फैसला भारत और चीन सहित उन कई देशों को प्रभावित कर सकता है, जो एक साथ ईरान और अमेरिका दोनों के साथ व्यापारिक रिश्ते रखते हैं।

ट्रंप ने क्या ऐलान किया?
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा,
“तुरंत प्रभाव से, इस्लामी गणराज्य ईरान के साथ व्यापार करने वाला कोई भी देश, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यापार पर 25 प्रतिशत टैरिफ देगा। यह आदेश अंतिम और निर्णायक है।”

सैन्य कार्रवाई के संकेतों के बीच टैरिफ का ऐलान
यह घोषणा ऐसे समय आई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर भी विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के पास ईरान पर हवाई हमला करने का विकल्प भी मौजूद है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान के लिए ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के जरिए कूटनीतिक बातचीत का एक चैनल खुला हुआ है। लेविट के मुताबिक, ईरान सार्वजनिक तौर पर कुछ और कहता है, जबकि निजी बातचीत में उसका रुख अलग नजर आता है।

ट्रंप के टैरिफ का भारत पर क्या असर?
चीन को ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार माना जाता है, लेकिन ट्रंप के इस फैसले का असर भारत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और तुर्की जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जो तेहरान के प्रमुख कारोबारी साझेदार हैं।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि 0.44 अरब डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर (करीब 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये) का रहा।

भारत के निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा 512.92 मिलियन डॉलर के कार्बनिक रसायनों का था। इसके बाद फल, मेवे और खट्टे फलों के छिलकों का निर्यात 311.60 मिलियन डॉलर और खनिज ईंधन, तेल व आसवन उत्पादों का निर्यात 86.48 मिलियन डॉलर रहा।

पहले से बढ़ा हुआ है टैरिफ दबाव
गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका पहले ही रूसी तेल की खरीद को लेकर भारतीय सामानों पर कुल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका है। यदि ईरान से व्यापार के कारण भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार और ज्यादा प्रभावित हो सकता है।

इस बीच, भारत और अमेरिका महीनों से एक व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं। अगर यह समझौता सफल होता है, तो इससे भारत को लंबे समय से अपेक्षित टैरिफ राहत मिल सकती है।

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