United States–Iran तनाव बरकरार, कूटनीति के साथ सैन्य तैयारी भी तेज
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन जिनेवा में चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य होते नहीं दिख रहे। दोनों देशों के बयानों से संकेत मिलते हैं कि बातचीत जारी है, पर भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है।
ईरान ने मंगलवार को कहा कि वार्ता के दौरान कुछ “मार्गदर्शक सिद्धांतों” पर सहमति बनी है, जिनका उद्देश्य संभावित टकराव को टालना है। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अब तक अमेरिका की सभी “रेड लाइन्स” को स्वीकार नहीं किया है।
सैन्य गतिविधियां भी तेज
कूटनीतिक बातचीत के समानांतर दोनों देशों की सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के कार्यकाल में मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी मजबूत की गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने F-22, F-35 और F-16 सहित 50 से अधिक लड़ाकू विमानों को क्षेत्र में तैनात किया है।
इससे पहले अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln को सहयोगी युद्धपोतों के साथ मध्य पूर्व भेजा गया था। इसके बाद USS Gerald R. Ford को भी तैनाती के आदेश दिए गए। इन कदमों को क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर उठाया गया बताया जा रहा है।
ईरान का जवाब
दूसरी ओर ईरान ने भी अपनी सैन्य तैयारियों का प्रदर्शन किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास किए हैं। यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei ने हालिया बयान में संकेत दिया कि देश अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने सीधे टकराव की घोषणा नहीं की, लेकिन मजबूत प्रतिक्रिया की चेतावनी जरूर दी।
बातचीत और तनाव—दोनों साथ
विशेषज्ञों का मानना है कि जिनेवा में जारी वार्ताएं फिलहाल संघर्ष टालने की दिशा में एक मंच उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सैन्य तैयारी दोनों पक्षों के बीच अविश्वास को दर्शाती है। मौजूदा हालात में यह साफ है कि कूटनीति और शक्ति प्रदर्शन दोनों समानांतर चल रहे हैं। आने वाले दिनों में वार्ता की दिशा और क्षेत्रीय हालात तय करेंगे कि तनाव घटेगा या और बढ़ेगा।
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