केंद्रीय दवा नियामक संस्था Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) की जनवरी माह की ताजा रिपोर्ट में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर अहम जानकारी सामने आई है।
नियमित सैंपलिंग और परीक्षण के दौरान कुल 240 दवाओं के नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे और उन्हें ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) घोषित किया गया। इनमें से 68 सैंपल केंद्रीय दवा प्रयोगशालाओं में और 172 सैंपल राज्य स्तरीय दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांच के दौरान असफल पाए गए।
NSQ का क्या मतलब है?
CDSCO हर महीने देशभर से दवाओं के नमूने एकत्र कर उनकी गुणवत्ता की जांच करता है। किसी दवा को NSQ तब घोषित किया जाता है जब वह निर्धारित मानकों—जैसे शुद्धता, घुलनशीलता, सक्रिय तत्व की मात्रा या अन्य तकनीकी मानदंड—में से किसी एक या अधिक पर विफल हो जाती है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई संबंधित बैच तक सीमित होती है। यानी जिस विशेष बैच का सैंपल जांच में फेल हुआ है, उसी पर असर माना जाता है। इससे उसी कंपनी की अन्य दवाओं या अलग बैच की गुणवत्ता पर स्वतः सवाल नहीं उठता।
नकली दवाओं का भी खुलासा
रिपोर्ट में तीन नकली दवाओं की पहचान भी की गई है। ये मामले Delhi, Uttarakhand और West Bengal से जुड़े हैं। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि कुछ निर्माताओं ने स्थापित ब्रांड नामों का दुरुपयोग कर फर्जी उत्पाद बाजार में उतारे।
CDSCO ने स्पष्ट किया है कि इन मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बाजार से हटाए जा रहे हैं संदिग्ध उत्पाद
नियामक संस्था राज्य दवा नियंत्रकों के साथ मिलकर खराब और नकली दवाओं की पहचान कर उन्हें बाजार से हटाने की प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रखती है। उद्देश्य यह है कि उपभोक्ताओं तक केवल सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाली दवाएं ही पहुंचें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित सैंपलिंग और सार्वजनिक रिपोर्टिंग से दवा कंपनियों की जवाबदेही बढ़ती है और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
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