मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरे के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं।
विदेश मंत्री S. Jaishankar ने मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi से फोन पर विस्तार से बातचीत की। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बातचीत मानी जा रही है।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि बातचीत के दौरान क्षेत्र में तेजी से बदल रहे हालात और संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने स्थिति को देखते हुए लगातार संपर्क में बने रहने पर भी सहमति जताई।
नए सर्वोच्च नेता की नियुक्ति के बाद पहली बातचीत
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब ईरान में Mojtaba Khamenei को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति उनके पिता Ali Khamenei की हालिया हमले में मौत के बाद की गई। इस संवेदनशील पृष्ठभूमि में भारत और ईरान के बीच यह संवाद कूटनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी चर्चा
ईरानी विदेश मंत्री के अलावा जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री Cho Hyun से भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। भारत ने क्षेत्रीय अस्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ रहे असर को लेकर अपनी चिंताओं से उन्हें अवगत कराया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट का असर
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक तेल और गैस बाजार में उथल-पुथल देखी जा रही है। दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है, इसलिए यहां पैदा हुआ संकट भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।
युद्धपोत की घटना पर स्पष्टता नहीं
इस बीच अमेरिका द्वारा 4 मार्च को श्रीलंका के पास एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना पर दोनों मंत्रियों के बीच चर्चा हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। भारत ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अस्थिरता पर गहरी चिंता जताई। साथ ही सभी पक्षों से संयम बरतने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए संवाद का रास्ता अपनाने की अपील दोहराई।
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