ईरान के पूर्व शाही परिवार के वारिस रजा पहलवी एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि अगर मौजूदा इस्लामी गणराज्य सत्ता से हटता है तो वे देश में नई सरकार बनाने के लिए तैयार हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा संदेश जारी कर पहलवी ने बताया कि उन्होंने संभावित संक्रमणकालीन सरकार की तैयारी भी शुरू कर दी है।
पहलवी ने यह भी बताया कि उन्होंने ईरान में नई व्यवस्था बनाने के लिए दो अलग-अलग टीमें बनाई हैं। इसके साथ ही वे कई मौकों पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। ऐसे में साफ है कि वे खुद को भविष्य में ईरान की सत्ता के संभावित दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं।
हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में संभव हो पाएगा? क्योंकि हाल ही में Venezuela में एक ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला, जहां अंतरराष्ट्रीय समर्थन और उम्मीदों के बावजूद सत्ता परिवर्तन वैसा नहीं हो सका जैसा विपक्षी नेताओं ने सोचा था।
पहलवी का संदेश
अपने संदेश में पहलवी ने लिखा कि इस्लामी गणराज्य के पतन के बाद शासन व्यवस्था में किसी तरह की अराजकता न फैले, इसके लिए पिछले कुछ महीनों में दो अहम कदम उठाए गए हैं।
पहला, “ईरान समृद्धि परियोजना” के तहत देश के शासन के लिए एक स्पष्ट योजना तैयार की गई है।
दूसरा, संभावित संक्रमणकालीन सरकार में काम करने के लिए योग्य लोगों की पहचान और चयन किया गया है।
पहलवी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में देश के भीतर और बाहर से कई विशेषज्ञों और पेशेवर लोगों ने ईरान के पुनर्निर्माण में योगदान देने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में बनने वाली संक्रमणकालीन व्यवस्था इस्लामी गणराज्य के पतन के तुरंत बाद सत्ता संभालने के लिए तैयार रहेगी।
पहलवी परिवार और ईरान का इतिहास
पहलवी राजवंश ईरान का आखिरी शाही परिवार था, जिसने 1925 से 1979 तक देश पर शासन किया। इस दौर में ईरान को आधुनिक और पश्चिमी प्रभाव वाला देश बनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन अंततः 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद इस राजवंश का अंत हो गया।
इस वंश के दो प्रमुख शासक रहे:
Reza Shah Pahlavi – पहलवी राजवंश के संस्थापक, जिन्होंने 1925 में सत्ता संभाली और ईरान के आधुनिकीकरण की नींव रखी।
Mohammad Reza Shah Pahlavi – रजा शाह के बेटे, जिन्हें आमतौर पर “ईरान के शाह” के रूप में याद किया जाता है। उनके शासनकाल में आर्थिक और सामाजिक सुधार हुए, लेकिन तानाशाही और गुप्त पुलिस के कारण जनता में असंतोष भी बढ़ा।
आखिरकार Iranian Revolution के बाद शाह को सत्ता छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा और ईरान में इस्लामी गणराज्य की स्थापना हुई।
आज शाह परिवार के कई सदस्य अमेरिका और यूरोप में रहते हैं, जबकि रजा पहलवी निर्वासन में रहकर मौजूदा ईरानी सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहते हैं।
वेनेजुएला का उदाहरण क्यों दिया जा रहा
पहलवी की संभावित सत्ता वापसी की चर्चा के बीच कुछ विश्लेषक वेनेजुएला का उदाहरण भी दे रहे हैं।
वहां की विपक्षी नेता María Corina Machado को लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष के चलते Nobel Peace Prize से सम्मानित किया गया था। उन्हें वेनेजुएला की “आयरन लेडी” भी कहा जाता है।
बताया जाता है कि उन्होंने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर उनकी तारीफ भी की थी और उम्मीद जताई थी कि अमेरिका वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन में मदद करेगा।
इसके बाद जनवरी 2026 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro को एक सैन्य अभियान के दौरान हिरासत में लिया गया। उस समय ऐसा माना जा रहा था कि अब विपक्ष सत्ता में आ सकता है।
लेकिन घटनाक्रम ने अलग मोड़ लिया और सत्ता अंततः मादुरो के करीबी सहयोगियों के हाथ में चली गई। ऐसे में कई विश्लेषक मानते हैं कि सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समर्थन या उम्मीदें सत्ता परिवर्तन की गारंटी नहीं होतीं।
क्या ईरान में ऐसा संभव है?
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था, सैन्य ढांचा और धार्मिक नेतृत्व काफी जटिल है। ऐसे में किसी बाहरी या निर्वासित नेता के लिए सीधे सत्ता संभालना आसान नहीं माना जाता।
इसी वजह से कई विशेषज्ञ मानते हैं कि रजा पहलवी की योजनाएं चर्चा जरूर पैदा करती हैं, लेकिन उनका वास्तविक परिणाम पूरी तरह ईरान की आंतरिक राजनीति और वहां की जनता के रुख पर निर्भर करेगा।
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