बेंगलुरु से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जहां एक डॉक्टर ने अपनी पत्नी की हत्या बेहोशी की दवा का ओवरडोज देकर कर दी।
आरोपी ने पूरी योजना बेहद शातिर तरीके से बनाई थी, लेकिन उसकी एक गलती ने सारा राज खोल दिया। सेशन कोर्ट ने मामले में ठोस सबूतों का हवाला देते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
मृतका 29 वर्षीय स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर कृतिका रेड्डी थीं, जो अपने घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गईं। उनके पति, डॉक्टर महेंद्र रेड्डी ने शुरुआत में दावा किया कि कृतिका की मौत पुरानी बीमारी के चलते हुई है। हालांकि जांच में खुलासा हुआ कि उन्हें ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाली बेहोशी की दवा प्रोपोफोल का ओवरडोज दिया गया था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह एक सोची-समझी साजिश थी। आरोपी ने अपने मेडिकल ज्ञान का इस्तेमाल कर इस हत्या को अंजाम दिया। मामले में सबसे अहम कड़ी वे डिजिटल सबूत बने, जिनमें आरोपी के अपनी गर्लफ्रेंड को भेजे गए मैसेज शामिल हैं। इन मैसेज में वह न सिर्फ अपने अपराध को लेकर पछतावा जताता दिखा, बल्कि अपनी गर्लफ्रेंड को यह भी निर्देश दे रहा था कि पुलिस पूछताछ में क्या कहना है।
एक मैसेज में उसने कथित तौर पर लिखा कि वह जल्द ही अपने माता-पिता और पत्नी के परिवार को सच्चाई बता देगा और यह भी स्वीकार किया कि उसने कृतिका की हत्या की है। इन चैट्स को अदालत में डिजिटल सबूत के रूप में पेश किया गया।
फोरेंसिक जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से 10 लाख से अधिक डेटा और मैसेज खंगाले, जिनमें सैकड़ों चैट रिकॉर्ड शामिल थे। डिलीट किए गए मैसेज भी रिकवर किए गए, जिससे पूरे घटनाक्रम की कड़ी स्पष्ट हुई। आरोपी की गतिविधियों, घटना से पहले और बाद के व्यवहार और पैसों के लेनदेन की भी गहन जांच की गई।
घटना 23 अप्रैल 2025 की है, जब कृतिका अपने पिता के घर पर बेहोश हो गई थीं। आरोपी पति ने इलाज के नाम पर उन्हें इंजेक्शन दिए और परिवार को भरोसा दिलाता रहा कि वह उनका इलाज कर रहा है। कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई। शुरुआत में मामला सामान्य लगा, लेकिन कृतिका की बहन को संदेह हुआ, जिसके बाद विस्तृत मेडिकल जांच कराई गई।
फोरेंसिक रिपोर्ट में कृतिका के शरीर में प्रोपोफोल की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिससे हत्या का मामला सामने आया। इसके बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर आरोपी को अक्टूबर में मणिपाल से गिरफ्तार किया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी के परिवार का आपराधिक इतिहास रहा है, जिसे शादी के समय छिपाया गया था। फिलहाल अदालत ने साफ किया है कि उपलब्ध सबूतों को देखते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती और मामले की सुनवाई जारी है।
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