उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और जानलेवा लू की चपेट में है। लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
गुरुवार को उत्तर प्रदेश का बांदा 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ लगातार पांचवें दिन देश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया। कई राज्यों में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है और गर्म हवाओं ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।
राजधानी दिल्ली में गर्मी का असर अब स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है। यहां हीट स्ट्रोक के दो गंभीर मामले सामने आए हैं, जिनमें एक मरीज वेंटिलेटर पर है। अस्पतालों में ब्रेन स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से जुड़े मामलों में भी तेजी देखी जा रही है। लखनऊ के प्रमुख अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में मरीज भर्ती किए गए हैं।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय न होने के कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी लगातार बढ़ रही है। लू की स्थिति लंबे समय तक बनी रहने से हालात और गंभीर हो गए हैं। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में गुरुवार की रात पिछले करीब 14 वर्षों में मई की सबसे गर्म रातों में शामिल रही, जहां न्यूनतम तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं दिन का तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया।
उत्तर प्रदेश के कई शहर भी भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। प्रयागराज में 46.6 डिग्री, वाराणसी में 45.6 डिग्री, हमीरपुर और सुल्तानपुर में 45.2 डिग्री तथा आगरा में 44.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक भीषण लू चलने की चेतावनी जारी की है।
पंजाब, बिहार और झारखंड में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पंजाब के फरीदकोट में तापमान 45.9 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि बिहार और झारखंड के कई जिलों में भी तेज गर्मी और हीट वेव का असर देखा जा रहा है। बिहार के कई जिलों में हीट वेव अलर्ट जारी किया गया है। पटना प्रशासन ने पांचवीं तक के सभी स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां अस्थायी रूप से रोक दी हैं, जबकि ऊपरी कक्षाओं के समय में भी बदलाव किया गया है।
झारखंड में स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेने, हल्के सूती कपड़े पहनने और धूप से बचने की सलाह दी है।
डॉक्टरों के अनुसार, लगातार तेज गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन, हीट स्ट्रोक, दिल और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों, बाहर काम करने वाले मजदूरों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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