इटली में 12 वर्षीय बच्ची की मौत के बाद Meta और TikTok पर मुकदमा, सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर उठे सवाल
इटली में 12 वर्षीय रोसेला रोजेरो उगुएस की मौत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। रोसेला के माता-पिता का आरोप है कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम ने उनकी बेटी को लगातार मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-नुकसान से जुड़े कंटेंट की ओर धकेला, जिससे उसकी मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा।
रोसेला की मां आइरीन ने बताया कि उनकी बेटी के व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगा था। परिवार को शुरुआत में इसकी वजह समझ नहीं आई, लेकिन बाद में जब उन्होंने उसका मोबाइल फोन और लैपटॉप देखा तो पता चला कि वह उनकी जानकारी से कहीं अधिक समय सोशल मीडिया पर बिता रही थी।
परिजनों के अनुसार, रोसेला ने इंस्टाग्राम पर ‘Just a dead pers0n’ नाम से एक फर्जी अकाउंट बनाया था, जिसमें अंग्रेजी अक्षर ‘o’ की जगह अंक ‘0’ का इस्तेमाल किया गया था। बताया गया कि सितंबर 2023 से उसने अवसाद और मानसिक परेशानियों से जुड़े कंटेंट देखना शुरू किया था। परिवार का दावा है कि इसके बाद उसकी मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई।
उत्तरी इटली के एस्टी शहर में रॉयटर्स से बातचीत में आइरीन ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे यह प्रक्रिया अपने आप बढ़ती चली गई और धीरे-धीरे उनकी बेटी के स्वभाव और व्यक्तित्व पर हावी हो गई। उन्होंने इसे अचानक आई एक विनाशकारी बीमारी जैसा अनुभव बताया।
रोसेला के माता-पिता अब उन परिवारों में शामिल हैं जिन्होंने पहली बार इटली में इंस्टाग्राम और फेसबुक की मूल कंपनी Meta तथा TikTok के खिलाफ सामूहिक मुकदमा दायर किया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को नाबालिगों की सुरक्षा के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाने चाहिए और संभावित जोखिमों को लेकर बेहतर जागरूकता सुनिश्चित करनी चाहिए।
हालांकि, Meta ने इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि किशोर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए “टीन अकाउंट्स” सहित कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं और उन्हें लगातार मजबूत किया जा रहा है। वहीं TikTok ने दावा किया है कि वह बड़ी मात्रा में हानिकारक सामग्री को हटाता है और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा बढ़ाने के लिए लगातार निवेश कर रहा है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पूरे यूरोप में बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ब्रिटेन में कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़े नियमों पर चर्चा हो रही है, जबकि यूरोपीय संघ डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है।
मामले से जुड़े वकील स्टेफानो कोमोडो का कहना है कि उद्देश्य सोशल मीडिया के फायदों को नकारना नहीं है, बल्कि उन तकनीकी और मार्केटिंग तरीकों पर सवाल उठाना है जो कमजोर और कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। वहीं, कई अभिभावकों का मानना है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं और बच्चे आसानी से उम्र संबंधी या अन्य सुरक्षा फिल्टर को दरकिनार कर लेते हैं।
रोसेला का मामला अब केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी, एल्गोरिदम की भूमिका और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर वैश्विक बहस का हिस्सा बन गया है।
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