रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शनिवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए।
रूस के कब्जे वाले जापोरिज्जिया क्षेत्र में यूक्रेनी हमलों में 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि यूक्रेन के उत्तर-पूर्वी सुमी क्षेत्र में रूसी ड्रोन हमले में तीन लोगों के मारे जाने की सूचना है। इन हमलों के बीच ऊर्जा ढांचे पर बढ़ते हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं भी खड़ी कर दी हैं।
रूस ने लगाया ‘ऊर्जा आतंकवाद’ का आरोप
रूस ने कजाखस्तान के कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम (CPC) पर हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले को “ऊर्जा आतंकवाद” करार दिया है। मॉस्को का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण पहले से प्रभावित वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति पर इस हमले का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
दुनिया की 2% तेल आपूर्ति पर असर
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि सीपीसी कजाखस्तान, रूस और अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी वाला संयुक्त उपक्रम है। इसी पाइपलाइन के जरिए वैश्विक तेल निर्यात का लगभग 2 प्रतिशत हिस्सा भेजा जाता है। गुरुवार को हुए ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन से तेल की आपूर्ति घटा दी गई थी।
काला सागर का निर्यात टर्मिनल भी बंद
हमले के बाद शुक्रवार को काला सागर स्थित सीपीसी के तेल निर्यात टर्मिनल का संचालन भी रोक दिया गया। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने और कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रूस का आरोप है कि ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, जबकि यूक्रेन की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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