1 अगस्त से लागू हुए 5 बड़े बदलाव! रेलवे, UPI, LPG और क्रेडिट कार्ड समेत जानें क्या बदला

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1 अगस्त 2026 से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और पर्सनल फाइनेंस से जुड़े कई अहम नियम बदल गए हैं।

एलपीजी सिलेंडर की कीमतों से लेकर रेलवे टिकट बुकिंग, क्रेडिट कार्ड, सीकेवाईसी और आयकर रिटर्न (ITR) तक कई बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आपकी जेब और वित्तीय योजनाओं पर पड़ सकता है।

1. एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें

हर महीने की पहली तारीख की तरह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा की है। इस बार 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में कटौती की गई है, जबकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

2. तत्काल टिकट बुकिंग का नया सिस्टम

पश्चिम मध्य रेलवे ने रिजर्वेशन काउंटर से तत्काल टिकट बुक कराने वाले यात्रियों के लिए 1 अगस्त से टोकन-आधारित व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य लंबी कतारों को कम करना, भीड़ का बेहतर प्रबंधन करना और टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

3. CKYC 2.0 की शुरुआत

बैंकिंग, बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं में ग्राहक सत्यापन को अधिक सुरक्षित और आसान बनाने के लिए सेंट्रल केवाईसी (CKYC) 2.0 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इससे केवाईसी प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक तेज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

4. क्रेडिट कार्ड के नियमों में बदलाव

1 अगस्त से कई बैंकों ने अपने क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। रिवॉर्ड पॉइंट्स, लेट पेमेंट शुल्क, प्रोसेसिंग फीस और कुछ अन्य सुविधाओं में बदलाव लागू हो गए हैं। कार्डधारकों को अपने बैंक द्वारा जारी नए नियमों की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए।

5. एटीएफ और ईंधन कीमतों की समीक्षा

हर महीने की तरह इस बार भी ऑयल कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों की समीक्षा की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर नए रेट तय किए गए हैं। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर भी नियमित समीक्षा जारी रहेगी।

6. ITR दाखिल करने की समय सीमा समाप्त

वेतनभोगी कर्मचारियों और गैर-ऑडिट श्रेणी के व्यक्तिगत करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 थी। अब इसके बाद रिटर्न दाखिल करने पर आयकर नियमों के अनुसार विलंब शुल्क (लेट फीस) देना पड़ सकता है। जुर्माने की राशि करदाता की कुल आय और लागू प्रावधानों के अनुसार तय होगी।

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