खुदरा बाजार में चीनी के दाम 64 रुपये किलो के करीब, बढ़ती कीमतों पर सरकार की सख्ती

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खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है।

मंगलवार को औसत खुदरा भाव करीब एक रुपये बढ़कर 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। कुछ स्थानों पर उपभोक्ताओं को चीनी के लिए 76 रुपये किलो तक चुकाने पड़े।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 25 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा भाव 63.97 रुपये किलो रहा। यह एक महीने पहले के 48.81 रुपये और एक साल पहले के 46.31 रुपये प्रति किलो की तुलना में क्रमशः करीब 31 प्रतिशत और 38 प्रतिशत अधिक है।

थोक बाजार में भी कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोमवार को चीनी का औसत थोक भाव 59.23 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि एक महीने पहले यह 45.35 रुपये और एक साल पहले 43.01 रुपये प्रति किलो था।

हालांकि, पिछले कुछ दिनों में मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में गिरावट आई है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने सोमवार को कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उनके मुताबिक, चीनी आयात की अनुमति और सट्टेबाजी तथा जमाखोरी पर रोक लगाने के सरकारी कदमों के बाद एक्स-मिल कीमत करीब 18 प्रतिशत घटकर 55 रुपये प्रति किलो हो गई है। पिछले सप्ताह यह रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी।

चीनी उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 विपणन वर्ष में एथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग के बाद चीनी का उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है। शुरुआती स्टॉक लगभग 50 लाख टन था, जबकि घरेलू खपत 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। सितंबर के अंत तक करीब 35 लाख टन का स्टॉक बचने का अनुमान है। मौजूदा विपणन वर्ष में कुल चीनी उत्पादन करीब 309 लाख टन रहने की उम्मीद है।

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवरे ने कहा कि देश के किसी भी राज्य में चीनी की एक्स-मिल कीमत 55 रुपये प्रति किलो से अधिक नहीं है। उन्होंने बताया कि जमाखोरी पर नजर रखने के लिए देशभर में फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए गए हैं।

आयात नियमों में सरकार ने दी राहत

घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। उद्योग की ओर से आयातित खेप पहुंचने में देरी की चिंता जताए जाने के बाद सरकार ने कच्ची चीनी के प्रसंस्करण और घरेलू बिक्री की समयसीमा भी बढ़ा दी है।

पहले आयातकों को भारत पहुंचने के बाद कच्ची चीनी का प्रसंस्करण कर उसे 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेचने को कहा गया था। चीनी उद्योग ने इस समयसीमा को अव्यावहारिक बताते हुए ब्राजील के बंदरगाहों पर भीड़भाड़ और भारत तक खेप पहुंचने में करीब 40 दिन लगने का हवाला दिया था।

इन परिस्थितियों को देखते हुए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 24 अगस्त को संशोधित अधिसूचना जारी कर आयातित कच्ची चीनी के प्रसंस्करण और बिक्री की समयसीमा को दो महीने बढ़ा दिया। NFCSF ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

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