SIR पर EC की अंदरूनी आपत्तियां, फाइलें और मीटिंग का ब्योरा तलब; सुप्रीम कोर्ट में INDI गठबंधन ने क्या मांगा?
SIR और EVM पर विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट में दांव, राहुल गांधी समेत 11 नेताओं ने रखीं कई मांगें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं और हजारों समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। इस दौरान विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), वोटरों के नाम हटाने की प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में संयुक्त याचिका दाखिल की।
याचिका में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों और चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। साथ ही, SIR के दौरान कथित तौर पर मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल खड़े किए। याचिकाकर्ताओं ने SIR प्रक्रिया को फिलहाल रोकने और पंजाब समेत चुनाव वाले राज्यों की मतदाता सूची में सभी पात्र नागरिकों के नाम शामिल करने की मांग भी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्तियां SIR की वैधता पर अंतिम फैसला देने के बजाय प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने से जुड़ी हैं।
याचिका दाखिल करने वाले विपक्षी नेता कौन हैं?
संयुक्त याचिका पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, माकपा के एमए बेबी, भाकपा के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं।
CJI से मुलाकात नहीं होने पर क्या बोले राहुल गांधी?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश का सम्मान करता है।
राहुल ने कहा, “हम CJI और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं। हमें खुशी है कि उन्होंने हमें आगे का रास्ता दिखाया है।” उन्होंने कहा कि याचिका दाखिल करने का विकल्प बताना भी आगे बढ़ने का एक रास्ता है।
याचिका में किन मांगों पर जोर दिया गया?
विपक्षी गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह एक स्वतंत्र जांच पैनल गठित करे। इस पैनल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाए और इसमें तकनीकी विशेषज्ञों तथा प्रतिष्ठित लोगों को शामिल किया जाए। पैनल को मतदाता सूची के डेटाबेस की विश्वसनीयता और SIR लागू करने की प्रक्रिया की जांच करने की जिम्मेदारी देने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग से SIR से संबंधित सभी फाइलें, बैठकों के कार्यवृत्त, आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियां और सिस्टम के एक्सेस लॉग उपलब्ध कराने की मांग भी की है। इसके अलावा, पैनल के जरिए EVM से संबंधित प्रक्रियाओं, कार्यप्रणाली, प्रोटोकॉल और तकनीकी ढांचे की समीक्षा कराने का अनुरोध किया गया है।
विपक्ष ने क्या तर्क दिए?
याचिका में कहा गया है कि यह मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है। विपक्ष का कहना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना, चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को बनाए रखना तथा मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि चुनावी व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रहे।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी उठाए सवाल
विपक्ष ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित तौर पर किए गए अनधिकृत बदलावों पर भी आपत्ति जताई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रसन्ना एस ने दलील दी कि कानून में निर्धारित फॉर्म में बिना वैधानिक अधिकार के अतिरिक्त शर्तें जोड़ने से पात्र नागरिकों, खासकर पहली बार मतदान करने वालों के लिए पंजीकरण मुश्किल हो सकता है। इससे ऐसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची से बाहर रहने का खतरा है, जो नाम शामिल कराने के हकदार हैं।
याचिका में यह भी कहा गया कि चुनाव आयोग को फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता पंजीकरण से जुड़े 1960 के नियमों के अनुरूप करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ कमियां बताईं, जिस पर विपक्षी गठबंधन के वकील ने उन्हें निर्धारित समय के भीतर दूर करने की बात कही।
ECINET और ERONET की कार्यप्रणाली पर सवाल
विपक्षी नेताओं ने ECINET और ERONET जैसे मतदाता सूची डेटाबेस के केंद्रीकृत और कथित रूप से अपारदर्शी संचालन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उचित नोटिस और सुनवाई के बिना बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाना गंभीर सवाल खड़े करता है। उनके मुताबिक, गलत तरीके से हटाए गए नामों को दोबारा शामिल करने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया कि मामले पर अंतिम निर्णय आने तक चुनाव आयोग संवैधानिक प्रावधानों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुसार काम करे।
हटाए गए मतदाताओं का बूथ-वार ब्योरा जारी करने की मांग
विपक्ष ने चुनाव आयोग से SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए सभी नामों का बूथ-वार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। इसमें प्रत्येक नाम हटाने का कारण बताने और उम्र व लिंग के आधार पर हटाए गए मतदाताओं का आंकड़ा जारी करने की मांग भी शामिल है।
इसके साथ ही, विपक्ष ने पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल करने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया। गठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया निष्पक्ष, जवाबदेह और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि कोई भी योग्य नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।
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