अराघची की इस्लामाबाद यात्रा खत्म, ट्रंप ने विटकॉफ-कुशनर दौरा रद्द किया

1

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता पर अनिश्चितता के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।

घटनाक्रम ऐसा रहा कि ईरान ने अपने रुख से न सिर्फ इस्लामाबाद बल्कि अमेरिका को भी असहज स्थिति में डाल दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधियों से मिलने से इनकार कर दिया।

पाकिस्तान की कोशिश थी कि अराघची की मुलाकात स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से कराई जाए, ताकि दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत का रास्ता तैयार हो सके। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले इन प्रतिनिधियों के दौरे को मंजूरी दी थी, लेकिन ईरानी रुख के बाद उन्होंने यह यात्रा रद्द कर दी।

सूत्रों के मुताबिक, अराघची ने अमेरिका के साथ वार्ता से जुड़ी अपनी शर्तें और आपत्तियां पाकिस्तानी नेतृत्व को सौंप दीं और इसके बाद वह ओमान के लिए रवाना हो गए, जहां से उनकी रूस यात्रा प्रस्तावित है।

इस घटनाक्रम ने साफ संकेत दिया है कि ईरान वार्ता को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है और अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान अब इन मांगों को अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाने की कोशिश करेगा, लेकिन उसकी मध्यस्थता की भूमिका फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही है।

इस बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नीतियों को लेकर एक बार फिर कड़ी चेतावनी जारी की है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने के संकेत हैं।

जानकारी के अनुसार, इससे पहले 11–12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत हुई थी, जो करीब 21 घंटे तक चली, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। दोनों देशों के बीच मुख्य मतभेद होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बने हुए हैं।

अमेरिका चाहता है कि तेल आपूर्ति प्रभावित न हो और समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला रहे, जबकि ईरान इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाए रखने पर जोर दे रहा है। साथ ही, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक चाहता है, जबकि तेहरान इसे शांतिपूर्ण बताकर जारी रखने की बात कहता है।

ताजा घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत की राह आसान नहीं है और पाकिस्तान की मध्यस्थता भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है।

Comments are closed.