ट्रंप का बड़ा दावा: “मैं न होता तो भारत-पाक में करोड़ों मरते”

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन के दौरान एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया।

अपने भाषण की शुरुआत में ही उन्होंने कहा कि “अमेरिका का स्वर्ण युग शुरू हो चुका है” और दावा किया कि देश आज अपने इतिहास के सबसे मजबूत दौर में है। उन्होंने आर्थिक मोर्चे, सीमा सुरक्षा और विदेश नीति पर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि अमेरिका लगातार जीत दर्ज कर रहा है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति के वार्षिक संबोधन को स्टेट ऑफ द यूनियन कहा जाता है. अमेरिकी संविधान (अनुच्छेद II, धारा 3) के अनुसार राष्ट्रपति को समय-समय पर कांग्रेस को देश की स्थिति के बारे में जानकारी देना अनिवार्य है.

ट्रंप ने उन देशों को भी चेतावनी दी जो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया टैरिफ संबंधी फैसले के बाद व्यापार समझौतों से पीछे हटने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका अपने हितों से समझौता नहीं करेगा और जो देश अनुचित व्यापार नीतियां अपनाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी मेंस ओलंपिक हॉकी टीम के गोलटेंडर को प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम देने की घोषणा भी की। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका का मान बढ़ाया है।

स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन अमेरिकी लोकतांत्रिक परंपरा का अहम हिस्सा है। अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद II, खंड 3 के तहत राष्ट्रपति समय-समय पर कांग्रेस को देश की स्थिति की जानकारी देने और आवश्यक सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए बाध्य हैं। समय के साथ “समय-समय पर” की इस व्यवस्था को वार्षिक संबोधन के रूप में विकसित किया गया। रेडियो और टेलीविजन के दौर में यह परंपरा राष्ट्रीय प्रसारण का रूप ले चुकी है, जिसे आज स्टेट ऑफ द यूनियन के नाम से जाना जाता है।

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