ईरान में महंगाई के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों में 3,090 लोगों की मौत हो चुकी है।
यह जानकारी एक मानवाधिकार संगठन ने शनिवार को दी। आठ दिनों तक इंटरनेट सेवा बाधित रहने के बाद अब जैसे-जैसे क्षेत्रवार इंटरनेट बहाल हो रहा है, देश में हुई मौतों और नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आ रही है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इन प्रदर्शनों, मौतों, हिंसा और देश की बदनामी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
3 हजार से ज्यादा मौतें, 10 हजार से अधिक गिरफ्तार
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान ईरान में अब तक कुल 3,090 लोगों की मौत हुई है।
- इनमें 2,885 प्रदर्शनकारी,
- जबकि 205 सुरक्षाकर्मी और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि उनकी सटीक संख्या अभी सामने नहीं आई है। मृतकों का यह आंकड़ा 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान हुई मौतों से भी अधिक बताया जा रहा है।
ईरान सरकार का दावा
ईरान सरकार ने आरोप लगाया है कि हिंसा आम नागरिकों द्वारा नहीं, बल्कि हथियारबंद दंगाइयों द्वारा की गई। सरकार के मुताबिक ये लोग इजरायल और अमेरिका के एजेंट थे, जिन्होंने फायरिंग, आगजनी और तोड़फोड़ की और नागरिकों व सुरक्षाबलों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं।
तेहरान में हालात सामान्य होने के संकेत
लगातार दो हफ्ते चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद राजधानी तेहरान में पिछले चार दिनों से हालात अपेक्षाकृत शांत बताए जा रहे हैं। गुरुवार और शुक्रवार को कोई बड़ा प्रदर्शन दर्ज नहीं हुआ।
हालांकि सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है।
‘800 प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना थी’—ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व ने 800 से ज्यादा गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को सामूहिक रूप से फांसी देने की योजना बनाई थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया।
ट्रंप ने कहा कि इस फैसले को वापस लेने के लिए वे ईरानी नेतृत्व का आभार जताते हैं।
हालांकि ईरान सरकार ने किसी भी सामूहिक फांसी की योजना या उसके रद्द होने से इनकार किया है।
ईरान से लौटे कई भारतीय
विरोध प्रदर्शनों के बीच छात्रों सहित कई भारतीय नागरिक ईरान से स्वदेश लौट आए हैं। ये लोग शुक्रवार देर रात कमर्शियल उड़ानों से दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचे।
ईरान से लौटे एक यात्री अली नाकी ने कहा,
“हमें वहां कोई समस्या नहीं हुई। हम पहले इराक में थे, फिर ईरान गए और आठ दिन बाद भारत लौट आए।”
एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही छात्रा ने बताया कि इंटरनेट बंद होने की वजह से हालात की सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी, हालांकि जिस शहर में वह रह रही थी, वहां स्थिति सामान्य थी।
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