यमन में पूर्व राष्ट्रपति के बेटे अहमद अली सालेह को मौत की सज़ा, जानिए कौन हैं ये ताकतवर नेता

1

हूती अदालत ने सुनाई सज़ा-ए-मौत: यमन के पूर्व राष्ट्रपति के बेटे अहमद अली सालेह पर देशद्रोह का आरोप

यमन की राजधानी सना में हूती नियंत्रित एक सैन्य अदालत ने देश के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के बेटे ब्रिगेडियर जनरल अहमद अली सालेह को देशद्रोह, जासूसी और भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। हूती संचालित सबा न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने उनकी संपत्ति ज़ब्त करने और कथित गबन की गई राशि की वसूली का भी आदेश दिया है।

सना स्थित केंद्रीय सैन्य अदालत ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। अहमद सालेह पर ‘दुश्मन के साथ साजिश और सहयोग’ करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही, पूर्व सरकारी पद पर रहते हुए उनके कार्यों को देखते हुए अतिरिक्त दंड भी लगाया गया है।

कौन हैं अहमद अली अब्दुल्ला सालेह?
अहमद सालेह, यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के सबसे बड़े बेटे हैं। वे रिपब्लिकन गार्ड के कमांडर रह चुके हैं और एक समय लगभग 80,000 सैनिकों की सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व करते थे।

2013 से 2015 तक वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में यमन के राजदूत रहे, लेकिन तत्कालीन हादी सरकार ने उन्हें हटा दिया। अहमद, यमन की जनरल पीपुल्स कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष भी माने जाते हैं। 2017 में अपने पिता की मौत के बाद से वे अबू धाबी में निर्वासन में रह रहे हैं और राजनीतिक रूप से निष्क्रिय हैं।

राजनीतिक विरासत और पतन
अहमद को कभी यमन के भविष्य के राष्ट्रपति के रूप में देखा जाता था। 2004 में उन्हें ब्रिगेडियर जनरल बनाया गया और रिपब्लिकन गार्ड की कमान सौंपी गई। लेकिन 2011 के अरब स्प्रिंग आंदोलन ने उनके राजनीतिक कॅरियर की राह रोक दी। बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों के दबाव में उनके पिता को इस्तीफा देना पड़ा।

रियाद में हस्ताक्षरित एक समझौते के तहत उन्हें और उनके पिता को अभियोजन से छूट मिली, लेकिन सेना और राजनीतिक ढांचे में उनका प्रभाव बना रहा।

हूतियों से संबंध और टकराव
सितंबर 2014 में राजधानी सना पर हूती विद्रोहियों के कब्ज़े में अहमद की रिपब्लिकन गार्ड की बड़ी भूमिका थी। हालांकि, 2017 में सालेह और हूतियों का गठबंधन टूट गया और इसी वर्ष दिसंबर में हूती लड़ाकों ने अली अब्दुल्ला सालेह की हत्या कर दी।

अहमद को तब से अबू धाबी में नजरबंद रखा गया। 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने उन पर यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति जब्ती जैसे प्रतिबंध लगाए, जिन्हें जुलाई 2024 में हटा लिया गया। इसके एक महीने बाद यूरोपीय संघ ने भी उन्हें ब्लैकलिस्ट से बाहर कर दिया।

लेकिन अब हूती अदालत का यह फैसला अहमद सालेह के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे उनका राजनीतिक पुनरुत्थान और भी मुश्किल हो सकता है।

Comments are closed.