साइबर फ्रॉड पर RBI सख्त, खाते से पैसे गायब हुए तो बैंक देगा मुआवजा

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डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए आरबीआई ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इन नियमों के तहत अगर किसी ग्राहक के खाते से डिजिटल फ्रॉड के कारण पैसे निकलते हैं, तो उसकी भरपाई बैंक को करनी होगी। हालांकि, अगर यह साबित हो जाता है कि गलती ग्राहक की लापरवाही से हुई है, तो बैंक जिम्मेदार नहीं होगा।

नए प्रावधानों के मुताबिक 50 हजार रुपये तक के फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को तुरंत 25 हजार रुपये की अंतरिम राहत दी जाएगी, जबकि बाकी रकम के भुगतान के लिए अलग व्यवस्था तैयार की जा रही है।

1 जुलाई से लागू होंगे नए नियम
आरबीआई के ये निर्देश 1 जुलाई से लागू हो सकते हैं। क्रेडिट कार्ड से जुड़े फ्रॉड के मामलों में भी ग्राहकों को तुरंत राहत दी जाएगी। बैंक और कार्ड कंपनियां आपस में यह तय करेंगी कि गलती किसकी थी, लेकिन ग्राहक को भुगतान में देरी नहीं होगी।

ग्राहकों को भी बरतनी होगी सावधानी
आरबीआई ने ग्राहकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी के साथ ओटीपी साझा न करें, संदिग्ध ऐप डाउनलोड न करें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। बैंक से जुड़े मैसेज या अलर्ट को नजरअंदाज न करें और हर ट्रांजेक्शन की जानकारी ध्यान से जांचें।

शिकायत का समयबद्ध निपटान जरूरी
किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में ग्राहक को 5 कार्यदिवस के भीतर शिकायत दर्ज करनी होगी। बैंक को 30 दिनों के अंदर उस शिकायत का निपटान करना अनिवार्य होगा। साथ ही, बैंक को यह भी साबित करना होगा कि यदि गलती ग्राहक की थी तो क्यों।

बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा
70 वर्ष से अधिक आयु के ग्राहकों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान किए जा रहे हैं। ऐसे ग्राहक 50 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए किसी विश्वसनीय व्यक्ति को अधिकृत कर सकेंगे, जो ट्रांजेक्शन को सत्यापित करेगा। जरूरत पड़ने पर अधिकृत व्यक्ति को बदला भी जा सकेगा।

संदिग्ध खातों पर कड़ी निगरानी
साइबर अपराधियों पर लगाम कसने के लिए बैंकों को कम ट्रांजेक्शन वाले खातों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे खातों में बड़ी रकम आने पर अलर्ट सिस्टम सक्रिय होगा ताकि धोखाधड़ी को रोका जा सके।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को लेकर भी सुविधा बढ़ाई जा रही है। अब ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार कार्ड की अंतरराष्ट्रीय उपयोग सेटिंग को आसानी से नियंत्रित कर सकेंगे, जिससे विदेश में भुगतान करने में परेशानी नहीं होगी।

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