मिडिल ईस्ट संकट से भारत पर असर, तेल सप्लाई और भारतीयों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

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ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तेज होते सैन्य टकराव ने मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर भारत के सामरिक और आर्थिक हितों पर पड़ सकता है।

नई दिल्ली के सामने अब ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक संतुलन और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा जैसी कई मोर्चों पर एक साथ चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। भारत के ईरान और इजरायल दोनों के साथ संतुलित और करीबी संबंध रहे हैं। भारत–ईरान के बीच सालाना व्यापार दो अरब डॉलर से कुछ कम है, जबकि इजरायल के साथ वित्त वर्ष 2024–25 में कुल व्यापार 3.62 अरब डॉलर रहा। क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनने से इन द्विपक्षीय संबंधों और निवेश पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

FTA वार्ताओं पर असर की आशंका

यह संकट ऐसे समय सामने आया है जब भारत इजरायल और खाड़ी देशों के समूह Gulf Cooperation Council (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बातचीत कर रहा है। बढ़ते तनाव से इन वार्ताओं की गति और प्राथमिकताओं पर असर पड़ सकता है।

ऊर्जा के मोर्चे पर भारत की निर्भरता इस संकट को और गंभीर बनाती है। देश अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40–45% हिस्सा इसी क्षेत्र से मंगाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ने के बीच Brent Crude की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले महीनों के उच्च स्तरों में से एक है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता

मध्य पूर्व में लाखों भारतीय कामगार और छात्र रहते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इजरायल पर हमलों के बाद Embassy of India, Tel Aviv ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक आवाजाही से बचने को कहा।

संभावित आपात स्थिति में निकासी (इवैक्यूएशन) की तैयारी भी एक अहम पहलू हो सकता है, जैसा कि अतीत में अन्य संकटों के दौरान देखा गया है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने ‘X’ पर पोस्ट कर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में रह रहे हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार से तत्काल तथा सक्रिय कदम उठाने की मांग की।

विदेश मंत्रालय का बयान

विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों को लेकर भारत गहरी चिंता व्यक्त करता है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को और न बढ़ाने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

बयान में कहा गया कि विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति ही एकमात्र व्यवहारिक रास्ता है और सभी देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने यह भी बताया कि क्षेत्र में मौजूद भारतीय मिशन नागरिकों के संपर्क में हैं और उन्हें नियमित परामर्श जारी किया जा रहा है।

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