G7 का बड़ा फैसला, इमरजेंसी रिजर्व से 10 करोड़ बैरल तेल-डीजल बाजार में आएगा; ऊर्जा निर्यात पर रोक नहीं
G7 देशों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने इमरजेंसी रिजर्व से करीब 100 मिलियन बैरल यानी 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई है। सदस्य देशों ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वे ऊर्जा और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे।
G7 के संयुक्त बयान के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना और बाजार में स्थिरता लाना है। अमेरिका में शुक्रवार को डीजल की औसत कीमत 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही। AAA के आंकड़ों के अनुसार, 22 सितंबर को यह बढ़कर 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।
ट्रंप प्रशासन के दबाव के बीच फैसला
रिजर्व से तेल जारी करने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बीच आया है। ट्रंप प्रशासन ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यूरोपीय देशों से भी रणनीतिक डीजल भंडार बाजार में लाने की मांग कर रहा था।
अमेरिका ने यूरोपीय संघ पर दबाव बढ़ाते हुए कहा था कि वह अपने आपातकालीन डीजल भंडार का इस्तेमाल करे। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी थी कि ऐसा नहीं होने पर अमेरिका यूरोप को डीजल निर्यात रोकने पर विचार कर सकता है। यूरोपीय बाजार अमेरिकी डीजल आपूर्ति पर काफी निर्भर है, इसलिए ऐसी रोक से वहां ईंधन की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका थी।
IEA के जरिए होगी तेल की समन्वित रिलीज
G7 के संयुक्त बयान में कहा गया है कि पहले की प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के माध्यम से करीब 10 करोड़ बैरल तेल की समन्वित रिलीज की जाएगी। इसका मतलब है कि सदस्य देश आपस में तालमेल बनाकर अपने रणनीतिक भंडार से तेल और ईंधन बाजार में उतारेंगे।
मार्च में भी जारी किया गया था रिकॉर्ड तेल भंडार
आपातकालीन तेल भंडार खोलने का यह पहला मौका नहीं है। मध्य-पूर्व में संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बाद मार्च में IEA के नेतृत्व में उसके सदस्य देशों ने करीब 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में जारी करने पर सहमति जताई थी।
IEA के इतिहास में यह सबसे बड़ी सामूहिक आपातकालीन तेल रिलीज थी। अब G7 की नई घोषणा के जरिए एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति लाने की कोशिश की जा रही है।
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