जम्मू-कश्मीर में विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी की तैयारी, उमर सरकार ने पेश किए 3 विधेयक; 1.5 लाख से बढ़कर 3 लाख हो सकता है वेतन

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र में सोमवार को जनप्रतिनिधियों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े तीन अहम विधेयक पेश किए गए।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जो कानून, न्याय एवं संसदीय कार्य विभाग भी संभाल रहे हैं, ने तीनों विधेयक सदन में रखे। इनके जरिए मंत्रियों, मौजूदा विधायकों और पूर्व विधायकों से जुड़े मौजूदा कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव है। तीनों विधेयक पहले ही असाधारण राजपत्र में प्रकाशित किए जा चुके हैं।

मंत्रियों के वेतन से जुड़े कानून में संशोधन

विधेयक संख्या 13/2026 के जरिए जम्मू-कश्मीर मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन से संबंधित 1956 के कानून में बदलाव का प्रस्ताव है। इसमें मुख्यमंत्री, मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन तथा उनसे जुड़े अन्य प्रावधान शामिल हैं।

वहीं, विधेयक संख्या 14/2026 जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल के सदस्यों के वेतन और भत्तों से संबंधित 1960 के कानून में संशोधन के लिए लाया गया है। इसका सीधा संबंध मौजूदा विधायकों के वेतन और विभिन्न भत्तों से है।

तीसरा विधेयक, संख्या 15/2026, राज्य विधानमंडल के सदस्यों की पेंशन से संबंधित 1984 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसके तहत पूर्व विधायकों की पेंशन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया जाना है।

1.50 लाख से 3 लाख रुपये तक हो सकता है मासिक पैकेज

इन विधेयकों को सदन में पेश किए जाने से पहले विधानसभा की संबंधित समिति जनप्रतिनिधियों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं में बदलाव को लेकर अपनी सिफारिशें दे चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, समिति ने मौजूदा विधायकों के करीब 1.50 लाख रुपये के मासिक पैकेज को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी।

सिफारिश में विधायकों का मूल वेतन 60 हजार से बढ़ाकर 80 हजार रुपये करने और विभिन्न भत्तों में संशोधन का प्रस्ताव शामिल था। इसके अलावा आवास ऋण की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपये और वाहन अग्रिम की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की सिफारिश की गई थी।

विधायकों के निजी सहायकों के मासिक वेतन को भी 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का प्रस्ताव समिति ने रखा था।

पूर्व विधायकों की पेंशन में भी बदलाव का प्रस्ताव

समिति की सिफारिशों में पूर्व विधायकों के लिए पेंशन और भत्तों को मिलाकर कुल 1.10 लाख रुपये मासिक किए जाने का प्रस्ताव भी शामिल था।

हालांकि, विधानसभा में पेश किए गए तीनों विधेयकों के उपलब्ध विवरण से इन प्रस्तावित राशियों के अंतिम रूप से लागू होने की पुष्टि नहीं होती है। ऐसे में फिलहाल इन्हें समिति की सिफारिशों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम राशि और प्रावधान विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होंगे।

सोमवार को कुल पांच विधेयक पेश

सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कुल पांच विधेयक पेश किए। जनप्रतिनिधियों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े तीन विधेयकों के अलावा माल एवं सेवा कर से संबंधित कानून में संशोधन और कुछ आपराधिक प्रावधानों में बदलाव से जुड़े विधेयक भी सदन में रखे गए।

अब इन सभी विधेयकों पर विधानसभा की आगे की विधायी प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा।

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