चीन की मदद से मिसाइल क्षमता बढ़ा रहे हूती विद्रोही? इजरायल और सऊदी अरब को निशाना बनाने की तैयारी, रिपोर्ट में दावा
चीन से मिले पुर्जों के दम पर मिसाइलें बना रहे हूती विद्रोही? सऊदी अरब और इजरायल तक हमले की पहुंच, रिपोर्ट में दावा
ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही कथित तौर पर उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहे हैं, जो सऊदी अरब और इजरायल तक पहुंचने में सक्षम हो सकती हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन मिसाइलों के निर्माण में चीन से भेजे गए कुछ घटकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, चीन की प्रत्यक्ष भूमिका और इन उपकरणों के अंतिम उपयोग को लेकर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की जांच में जब्त किए गए उपकरणों और मिसाइल से जुड़े पुर्जों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इन घटकों से तैयार किए जा रहे हथियार ईरान की खेबर शेकन बैलिस्टिक मिसाइल के डिजाइन पर आधारित हो सकते हैं।
क्या है खेबर शेकन मिसाइल की खासियत?
खेबर शेकन एक सटीक निशाना साधने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी एक प्रमुख विशेषता उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता है, जिससे कुछ परिस्थितियों में इसे रोकना एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रिपोर्ट में जिस मिसाइल डिजाइन का उल्लेख किया गया है, उसकी संभावित मारक क्षमता करीब 1,200 मील बताई गई है। इतनी दूरी तक पहुंचने वाली मिसाइल सऊदी अरब और इजरायल के बड़े हिस्सों को अपनी संभावित जद में ला सकती है। हालांकि, हूती विद्रोहियों द्वारा विकसित किए जा रहे हथियारों की वास्तविक क्षमता और उनकी तैनाती की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जब्त की गई खेपों से मिले मिसाइल निर्माण के सुराग
CAR की जांच यमन के अधिकारियों द्वारा जुलाई में जब्त की गई दो खेपों पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल निर्माण से जुड़े उपकरणों को अन्य सामान के बीच छिपाकर भेजा गया था।
जब्त सामग्री में कथित तौर पर ये पुर्जे शामिल थे:
- मिसाइल मोटर और एयरफ्रेम के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विशेष धातु के घटक।
- उड़ान के दौरान स्थिरता बनाए रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले फिन्स।
- खेबर शेकन मिसाइल श्रृंखला में प्रयुक्त ठोस ईंधन वाले रॉकेट मोटर से जुड़े पुर्जे।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इन उपकरणों की प्रकृति और बनावट से संकेत मिलता है कि कुछ घटक उन्नत मिसाइल प्रणालियों के निर्माण में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
शिपिंग दस्तावेजों में चीनी कंपनी का जिक्र
रिपोर्ट के अनुसार, खेपों से जुड़े शिपिंग दस्तावेजों में चीन की एक ऐसी कंपनी का उल्लेख मिला है, जो सटीक धातु निर्माण और एयरोस्पेस से जुड़े घटकों में विशेषज्ञता रखती है।
हालांकि, किसी कंपनी का दस्तावेजों में नाम होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसने जानबूझकर हूती विद्रोहियों को मिसाइल बनाने में मदद की। कुछ घटकों का इस्तेमाल नागरिक और औद्योगिक कार्यों में भी हो सकता है, जबकि अन्य की बनावट सैन्य उपयोग की ओर संकेत कर सकती है।
सऊदी अरब और इजरायल की सुरक्षा को लेकर चिंता
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब क्षेत्र में ईरान, सऊदी अरब, इजरायल और अमेरिका से जुड़े तनाव लगातार सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट में हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर हूती हमलों और क्षेत्रीय टकराव का भी उल्लेख किया गया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं में संभावित बढ़ोतरी का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ तेल बाजारों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हूती विद्रोहियों के व्यवहार को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां की हैं।
फिलहाल, CAR की जांच से सामने आए विवरण हूती विद्रोहियों की मिसाइल निर्माण क्षमता और संभावित आपूर्ति नेटवर्क पर सवाल खड़े करते हैं। लेकिन चीन की सरकारी या प्रत्यक्ष सहायता, मिसाइलों की वास्तविक मारक क्षमता और उनके इस्तेमाल की योजना के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए अतिरिक्त प्रमाण आवश्यक होंगे।
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