बिहार में रिकॉर्ड मतदान, चुनावी समीकरण बदलने से राजनीतिक दल और विश्लेषक हुए उलझन में

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बिहार में रिकॉर्ड मतदान, चुनावी समीकरण बदलने से बढ़ी राजनीतिक उलझन

बिहार में इस बार रिकॉर्ड मतदान ने राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की समझ को उलझा दिया है। कौन बढ़े वोटर हैं और किसके पाले में गए, इस पर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं। मतगणना 14 नवंबर को होगी।

एनडीए और महागठबंधन का दावा
एनडीए का कहना है कि नीतीश-मोदी का सुशासन और “जंगलराज” का डर मतदाताओं को उनके पाले में लाया। वहीं, महागठबंधन का तर्क है कि सरकार को उखाड़ फेंकने की भावना के कारण बूथों पर कतारें लगीं।

सीमांचल में बढ़े मतदान ने चौंकाया
किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में मतदान करीब 80 प्रतिशत तक पहुंचा। इस क्षेत्र में लगभग 40 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। हालांकि, इस बार मुस्लिमों की तुलना में हिंदू मतदाताओं, खासकर महिलाओं ने अधिक सक्रियता दिखाई।

महिला मतदाताओं का असर
राज्यभर में महिलाओं ने पुरुषों से लगभग 10 प्रतिशत अधिक मतदान किया। पूर्णिया जिले की कसबा सीट पर 82 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि अमौर विधानसभा में 65 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं।

पारंपरिक रूप से दूरस्थ वोटरों ने बढ़ाया मतदान
दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोग भी इस बार अपने घर लौटकर वोट देने पहुंचे। मतदाता सूची में नाम कटने के डर से उन्होंने दिन-रात की मेहनत छोड़कर मतदान किया।

मतदान केंद्रों की तस्वीरें
मुस्लिम बहुल मतदान केंद्रों में बुर्के में खड़ी महिलाएं और पड़ोस के बूथों पर पल्लू ओढ़े महिला मतदाता कड़ी टक्कर दे रही थीं। यह नए चुनावी ट्रेंड को दर्शाता है।

बिहार में इस बढ़े मतदान से चुनावी नतीजों के समीकरण और भी पेचीदा हो गए हैं।

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