बांग्लादेश में आतंक और डर की राजनीति हावी’, पूर्व PM शेख हसीना का यूनुस सरकार पर हमला

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश की अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि एक समय स्थिर और विकासशील रहा बांग्लादेश अब अलोकतांत्रिक शासन के चलते व्यवस्थित रूप से बर्बादी की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में देश में आतंक और डर के सहारे राजनीति की जा रही है, जबकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

उस्मान हादी की हत्या पर बोलीं शेख हसीना
पिछले 17 महीनों से भारत में रह रहीं शेख हसीना ने दैनिक जागरण के सहायक संपादक जयप्रकाश रंजन से एक ऑनलाइन साक्षात्कार में कहा कि छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या और उसके बाद की घटनाएं अंतरिम सरकार की विफलता को उजागर करती हैं।

उनके मुताबिक, यह हत्या बीएनपी, जमात और एनसीपी के बीच चुनावी प्रतिद्वंद्विता का नतीजा थी, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया ने स्थिति को संभालने के बजाय और बिगाड़ दिया। उन्होंने बांग्लादेश में बढ़ती डर और धमकाने की राजनीति पर गहरी चिंता जताई।

यूनुस सरकार पर सवाल

शेख हसीना ने कहा,
“जब किसी सरकार के पास वैध जनादेश नहीं होता, तो सामान्य कानून-व्यवस्था की समस्याएं भी राष्ट्रीय संकट में बदल जाती हैं। अंतरिम सरकार न तो जनता को भरोसा दिला सकी और न ही निष्पक्ष व तेज़ जांच करा पाई। नतीजतन संदेह, गुस्सा और हिंसा बढ़ती चली गई।”

उन्होंने मीडिया संस्थानों पर हुए हमलों को लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया और कहा कि जिस समय आत्ममंथन और शोक की आवश्यकता थी, उस समय चरमपंथी तत्वों ने हिंसा और तोड़फोड़ का रास्ता अपनाया।

“पत्रकार डर के साए में काम कर रहे हैं”

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा,
“मेरे कार्यकाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया गया। असहमति को दबाया नहीं गया, बल्कि सुना गया। आज पत्रकार डर के माहौल में काम करने को मजबूर हैं।”

18 महीनों में फैली अराजकता
देश में बढ़ती लक्षित हिंसा पर चिंता जताते हुए शेख हसीना ने कहा कि छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक खतरनाक पैटर्न का हिस्सा है।

उनके अनुसार,
“पिछले 18 महीनों में हमने देखा है कि कैसे एक अलोकतांत्रिक व्यवस्था ने एक स्थिर देश को अराजकता की ओर धकेल दिया है। रोज़मर्रा की हिंसा सामान्य होती जा रही है और अधिकारी या तो आंख मूंदे हुए हैं या परोक्ष रूप से इसे बढ़ावा दे रहे हैं।”

अल्पसंख्यकों पर हमले का आरोप
अल्पसंख्यकों की स्थिति पर बोलते हुए शेख हसीना ने हिंदू गारमेंट मजदूर दीपु चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या को “भयावह और शर्मनाक” बताया।

उन्होंने कहा,
“धर्म के नाम पर हिंसा बांग्लादेश की मूल भावना के खिलाफ है। मेरी सरकार में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा संवैधानिक जिम्मेदारी थी। आज हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों और अहमदिया मुसलमानों पर हमले आम हो चुके हैं, लेकिन अंतरिम सरकार या तो इनकार करती है या इन्हें कमतर दिखाती है।”

भारत-विरोधी नारों पर प्रतिक्रिया

भारत-विरोधी नारों और भारतीय उच्चायोग की ओर किए गए मार्च पर शेख हसीना ने कहा कि यह दुश्मनी कृत्रिम रूप से पैदा की गई है।

उनका आरोप है कि चरमपंथी ताकतें सरकार के संरक्षण में भारत विरोध को हवा दे रही हैं, जो बांग्लादेश के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ है।

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