बिहार में अनोखी लापरवाही: 100 करोड़ की पटना-गया सड़क बनी, लेकिन बीच में खड़े पेड़ रह गए वैसे के वैसे

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पटना-गया मार्ग पर अनोखी लापरवाही: 100 करोड़ की सड़क बनी, लेकिन पेड़ बीच सड़क में ही रह गए खड़े

सरकार भले ही आम जनता को विकास योजनाओं में सहभागी बनाने और विभागों के बीच समन्वय की बातें करती हो, लेकिन बिहार में धरातल पर इसका एक उल्टा उदाहरण देखने को मिल रहा है। जहानाबाद से गया की ओर जाने वाले मार्ग पर एरकी ग्रिड के पास सड़क के बीचों-बीच कई पुराने पेड़ अब भी खड़े हैं, जो लगातार दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं।

सड़क बनी, लेकिन पेड़ हटाना भूल गए
करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का चौड़ीकरण किया गया है। पहले ये पेड़ सड़क के किनारे थे, लेकिन अब चौड़ी सड़क बनने के बाद दर्जनों पेड़ इसके मध्य में आ गए हैं। इससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है।

विभागों के बीच समन्वय की कमी
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने समय पर पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) की मांग की थी, लेकिन आज तक उन्हें कोई आदेश नहीं मिला। वहीं, जिला वन क्षेत्र पदाधिकारी रितुपर्णा ने स्पष्ट किया कि जिला स्तर पर केवल निरीक्षण करने का अधिकार है, जबकि NOC की प्रक्रिया गया मुख्यालय से संचालित होती है। उन्होंने बताया कि अभी तक पेड़ कटाई को लेकर कोई निर्देश नहीं मिला है।

रात में और बढ़ जाता है खतरा
दिन के समय तो वाहन चालकों को पेड़ दिख जाते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में ये पेड़ और अधिक खतरनाक हो जाते हैं। हल्की सी असावधानी से वाहन सीधे पेड़ से टकरा सकते हैं। हालांकि, फिलहाल राहत की बात यह है कि बाईपास चालू हो जाने के कारण भारी वाहनों का इस मार्ग से गुजरना कम हो गया है, जिससे बड़ी दुर्घटनाएं टल रही हैं। लेकिन छोटे वाहन और मालवाहक गाड़ियां अभी भी इसी रास्ते से आती-जाती हैं, जिससे खतरा बना हुआ है।

सवालों के घेरे में जिम्मेदार विभाग
यह मामला एक बार फिर से सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता है। जब सड़क निर्माण जैसी बड़ी परियोजनाएं बिना पूर्ण योजना और तालमेल के क्रियान्वित की जाती हैं, तो परिणाम इस तरह के खतरनाक हालातों में सामने आते हैं।

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