ईरान का सऊदी अरब पर मिसाइल हमला, प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर अमेरिकी विमानों को नुकसान

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ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच जारी युद्ध के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

दोनों पक्षों की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब के एक सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में अमेरिकी वायुसेना के कई विमान क्षतिग्रस्त हो गए।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर तैनात अमेरिकी वायुसेना के पांच रिफ्यूलिंग (ईंधन भरने वाले) विमान ईरानी मिसाइल हमले में क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि ये विमान पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं और उनकी मरम्मत की जा रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

मध्य पूर्व में अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती

इसी बीच खबरें हैं कि अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अतिरिक्त सैनिकों और युद्धपोतों को क्षेत्र में भेज रहा है। बताया जा रहा है कि लगभग 2,500 अमेरिकी मरीन सैनिक तीन जहाजों पर सवार होकर मध्य पूर्व की ओर रवाना हुए हैं। इनमें उभयचर हमला जहाज यूएसएस त्रिपोली भी शामिल बताया गया है।

तेहरान में विस्फोट, तेल अवीव में भी धमाकों की आवाज

इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान में भी एक बड़ा विस्फोट होने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विस्फोट उस समय हुआ जब वहां फिलिस्तीन के समर्थन में और इज़रायल के खिलाफ एक रैली आयोजित की गई थी। विस्फोट फिरदौसी चौक के आसपास हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग कुद्स दिवस रैली में शामिल होने के लिए जुटे थे।

दूसरी ओर इज़रायल के प्रमुख शहर तेल अवीव में भी कई धमाकों की आवाज सुने जाने की खबर है। बताया गया कि यह घटनाएं उस समय हुईं जब इज़रायली सेना ने चेतावनी दी थी कि ईरान की ओर से मिसाइलें दागी गई हैं।

ट्रंप का दावा—ईरान झुकने वाला है

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने जी-7 देशों के नेताओं के साथ डिजिटल बैठक के दौरान कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में सफलता मिल रही है।

हालांकि जी-7 देशों के कई नेताओं ने अमेरिका से युद्ध को जल्द खत्म करने की अपील भी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस के नेताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि इस संघर्ष का फायदा किसी अन्य देश को नहीं उठाने दिया जाना चाहिए।

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