बिहार विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी इसकी राजनीतिक गर्मी झारखंड तक पहुंच गई है।
झारखंड के सियासी दिग्गज इंटरनेट मीडिया पर एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं। बिहार चुनाव में सक्रिय रहे गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, श्रम मंत्री संजय यादव और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के बीच अब खुली तकरार देखने को मिल रही है।
ऑनलाइन कमेंट्स ने विवाद को और उग्र बना दिया है। डॉ. निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर संजय यादव को “झारखंड का गुंडा” बताया, तो संजय यादव ने उन्हें “गोड्डा से कपड़े उतरवाकर खदेड़ने” की धमकी दे डाली। इससे पहले संजय यादव ने चुनाव प्रचार के दौरान दीपिका पांडेय सिंह पर भी नाराजगी जताई थी और कहा था कि विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने उनके लिए क्या किया—यह बताने की ज़रूरत नहीं।
कहलगांव सीट पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने अपने पुत्र रजनीश भारती को उम्मीदवार बनाया। नामांकन से पहले तेजस्वी यादव ने भी यहां की चुनावी हवा को तेज किया। बावजूद इसके, कांग्रेस ने इसे अपनी पारंपरिक सीट बताते हुए अपना प्रत्याशी खड़ा कर दिया। इसके बाद मंत्री दीपिका पांडेय सिंह कांग्रेस के समर्थन में खुलकर सामने आईं, जबकि गठबंधन के लिहाज से उन्हें राजद का साथ देना चाहिए था। इस पर दीपिका की ओर से किसी प्रतिक्रिया नहीं आई।
बिहार के कटोरिया, बांका, धोरैया, कहलगांव और पीरपैंती सीटों पर चुनाव प्रचार के दौरान झारखंड के कई बड़े चेहरे जुटे रहे। संजय यादव ने पूरे चुनाव में कहलगांव में अपने पुत्र रजनीश के लिए कैंप किया, लेकिन नतीजे में राजद को जदयू उम्मीदवार शुभानंद मुकेश के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इससे मंत्री संजय यादव की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठे।
भागलपुर और बांका जिलों की अधिकतर सीटें एनडीए के खाते में गईं। महागठबंधन इन इलाकों में लगभग साफ हो गया। दूसरी ओर, सांसद निशिकांत दुबे ने कहलगांव, पीरपैंती, भागलपुर, बिहपुर और नाथनगर जैसी सीटों पर ज़ोरदार प्रचार किया और एनडीए ने सभी जगह जीत हासिल की।
अब झामुमो ने मंत्री संजय यादव की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राजनीतिक तनाव किस रूप में आगे बढ़ेगा, यह आने वाला समय बताएगा।
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