सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: मृत और दूसरी जगह जा चुके लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाना सही

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाना गलत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मृत व्यक्तियों, संबंधित वार्ड से बाहर जा चुके लोगों और मतदाता सूची में दर्ज डुप्लीकेट नामों को हटाने में कुछ भी गलत नहीं है। अदालत ने आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की अपील खारिज कर दी। पार्टी ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें एसआईआर पूरा होने तक स्थानीय निकाय चुनाव स्थगित करने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।

पीठ ने कहा कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए एसआईआर आवश्यक है। मृत व्यक्तियों या संबंधित वार्ड से स्थानांतरित हो चुके लोगों को वहां मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी तरह, मतदाता सूची में दर्ज दोहरे नामों को हटाना भी जरूरी है। अदालत के मुताबिक, एसआईआर का उद्देश्य ऐसी ही विसंगतियों को दूर करना है।

अंतिम मतदाता सूची के आधार पर होंगे चुनाव

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए वही अंतिम मतदाता सूची मान्य होगी, जो चुनाव अधिसूचना जारी होने की तारीख पर उपलब्ध होगी। यह सूची एसआईआर के बाद तैयार की गई हो सकती है या फिर 1 जनवरी 2026 की मतदाता सूची हो सकती है।

सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि चुनाव की तारीखों की अधिसूचना अभी जारी नहीं की गई है। आयोग ने कहा कि अधिसूचना जारी होने के समय जो अंतिम मतदाता सूची उपलब्ध होगी, उसी के आधार पर चुनाव कराए जाएंगे।

पीठ ने आयोग के इस रुख से सहमति जताई। अदालत ने कहा कि यदि एसआईआर के बाद तैयार की गई अंतिम मतदाता सूची चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले प्रकाशित नहीं होती है, तो 1 जनवरी 2026 की मतदाता सूची के आधार पर स्थानीय निकाय चुनाव कराए जा सकते हैं।

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