क्या आप भी हेल्दी खान-पान और नियमित एक्सरसाइज के बावजूद वजन कम न होने से परेशान हैं? अगर हां, तो आप अकेली नहीं हैं। अपोलो मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, कोलकाता के स्त्री रोग विशेषज्ञ और FOGSI के अध्यक्ष डॉ. भास्कर पाल के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में होने वाली एक बेहद आम हार्मोनल समस्या है।
शोध बताते हैं कि PCOS से पीड़ित लगभग 40 से 80 प्रतिशत महिलाएं मोटापे या अधिक वजन से जूझती हैं, जो इस समस्या का एक प्रमुख और जिद्दी लक्षण है।
वजन कम करना क्यों बन जाता है मुश्किल?
सामान्य मोटापे के विपरीत, PCOS में बढ़ा हुआ वजन सामान्य डाइट और एक्सरसाइज से आसानी से कम नहीं होता। जब महिलाएं लगातार मेहनत करती हैं लेकिन परिणाम नहीं दिखते, तो वे अक्सर खुद को दोष देने लगती हैं। उन्हें लगता है कि शायद उनकी इच्छाशक्ति कमजोर है या उनमें अनुशासन की कमी है।
लेकिन सच्चाई यह है कि यह व्यक्तिगत विफलता नहीं है। शरीर में हार्मोनल असंतुलन और इंसुलिन रेजिस्टेंस फैट जमा होने और मेटाबॉलिज्म धीमा होने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। कई बार शुरुआत में थोड़ा वजन कम भी हो जाता है, लेकिन अंदरूनी शारीरिक समस्याओं के कारण वह जल्दी वापस बढ़ सकता है। इस तरह एक ऐसा चक्र बन जाता है जिसमें वजन को नियंत्रित करना बेहद कठिन हो जाता है।
मानसिक और भावनात्मक असर
जब शरीर आपकी कोशिशों का साथ नहीं देता, तो इसका असर मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। समाज में ‘पतले होने’ का दबाव महिलाओं में शर्मिंदगी और हीन भावना पैदा कर सकता है।
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भावनात्मक थकान और तनाव: अपने शरीर पर नियंत्रण खोने का एहसास मानसिक रूप से थका देता है।
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इमोशनल ईटिंग: तनाव से निपटने के लिए कई महिलाएं खाने का सहारा लेती हैं, जिससे बाद में अपराधबोध पैदा होता है और वे खाने को और सीमित कर देती हैं।
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भविष्य की चिंता: लगातार वजन, ब्लड शुगर और मासिक धर्म चक्र पर नजर रखना भी चिंता और घबराहट को बढ़ा सकता है।
सामाजिक दबाव और अकेलापन
दुर्भाग्य से, PCOS से जुड़े मोटापे को समाज में अक्सर गलत समझा जाता है। लोगों से बिना मांगे “कम खाओ” या “ज्यादा एक्सरसाइज करो” जैसी सलाहें मिलती रहती हैं। कई बार लोग यह नहीं समझते कि इसके पीछे हार्मोनल कारण होते हैं। ऐसी टिप्पणियों से बचने के लिए कुछ महिलाएं सामाजिक कार्यक्रमों और मेल-जोल से दूरी बनाने लगती हैं, जिससे अकेलापन बढ़ सकता है।
वजन को देखने का नजरिया बदलना जरूरी
PCOS में वेट मैनेजमेंट को अपराधबोध या कठोर डाइट के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। केवल वजन मापने वाली मशीन के नंबरों पर ध्यान देना निराशाजनक हो सकता है। इसके बजाय, लंबे समय तक टिकाऊ जीवनशैली अपनाने पर जोर देना चाहिए, जिसमें मेटाबॉलिज्म और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाए।
व्यक्तिगत जीवनशैली में किए गए छोटे लेकिन सकारात्मक बदलाव कठोर उपायों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित होते हैं।
सिर्फ पतला होना ही इलाज नहीं
PCOS के सफल प्रबंधन में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। जब महिलाओं को यह समझ में आता है कि बढ़ता वजन उनकी विफलता नहीं है, तो वे इलाज और जीवनशैली में बदलाव को बेहतर तरीके से अपना पाती हैं।
दरअसल, PCOS में वेट मैनेजमेंट इच्छाशक्ति की परीक्षा नहीं, बल्कि डॉक्टर और मरीज के बीच एक साझा यात्रा है। इसका लक्ष्य सिर्फ पतला होना नहीं, बल्कि थकान कम करना, मेटाबॉलिज्म सुधारना, मासिक धर्म संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करना और मानसिक रूप से मजबूत बनना है।
जब समाज और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस वास्तविकता को समझेंगे, तभी महिलाओं को सलाह से आगे बढ़कर सही सहानुभूति, समझ और सहयोग मिल सकेगा।
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