महाराष्ट्र में कुपोषण पर काबू: गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या में आई बड़ी गिरावट
महाराष्ट्र सरकार की सतत और समन्वित पहलों का असर अब साफ दिखने लगा है। राज्य में गंभीर रूप से कुपोषित (Severely Acute Malnourished – SAM) और मध्यम रूप से कुपोषित (Moderately Acute Malnourished – MAM) बच्चों की संख्या में बीते दो वर्षों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2023 के अंत तक गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या 80,248 (1.93%) थी, जो मार्च 2024 में घटकर 51,475 (1.21%) और मार्च 2025 तक घटकर 29,107 (0.61%) रह गई। इसी प्रकार, मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या भी क्रमशः 2.12 लाख (5.09%) से घटते हुए मार्च 2025 में 1.49 लाख (3.11%) तक पहुँच गई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस सफलता को राज्य के विभिन्न विभागों, एजेंसियों और मैदानी अधिकारियों के बीच प्रभावी समन्वय का परिणाम बताया। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और अन्य जिम्मेदार कर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि महाराष्ट्र कुपोषण मुक्त राज्य बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
योजनाओं और पहल का मिला सकारात्मक परिणाम
राज्य में कुपोषण से लड़ने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (ICDS) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसमें:
- 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को घर पर पूरक पोषण आहार (THR)
- 3 से 6 वर्ष के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर गर्म ताजा भोजन (HCM)
आदिवासी परियोजना क्षेत्रों में ‘भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अमृत आहार योजना’ के तहत अंडा, केला और एक समय का भोजन
गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए ग्रामीण और शहरी बाल विकास केंद्रों की स्थापना
इसके अलावा, ‘नर्चर एप’ और ‘पोषण ट्रैकर’ के माध्यम से बच्चों के विकास और पोषण स्तर की निगरानी की जा रही है। बच्चों का समय पर वजन और ऊंचाई दर्ज करने, शत-प्रतिशत गृहभ्रमण सुनिश्चित करने और प्रत्येक कुपोषित बच्चे पर विशेष ध्यान देने से परिणाम और बेहतर हुए हैं।
राज्य सरकार ने कुपोषण नियंत्रण के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसकी सिफारिशों के आधार पर समयबद्ध कार्रवाई हो रही है। योजनाओं की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा और मैदानी कर्मचारियों के निरंतर प्रशिक्षण व मार्गदर्शन से इस परिवर्तन को बल मिला है। सरकार का अगला लक्ष्य राज्य को पूरी तरह से कुपोषण मुक्त बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार और निगरानी बनी रही, तो महाराष्ट्र इस दिशा में देश के अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
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