उत्तरकाशी हादसा: सेना ने संभाला मोर्चा, युद्ध स्तर पर जारी राहत और बचाव अभियान

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धराली में तबाही के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, 300 के करीब लोग लापता, सेना-ITBP मैदान में

उत्तराखंड के धराली गांव में बादल फटने और भूस्खलन के बाद हालात भयावह बने हुए हैं। पूरे इलाके में मलबे का अंबार है और कई लोग अब भी लापता हैं। सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों की संयुक्त टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।

सेना के 150 से अधिक जवान, आईटीबीपी की 10 टीमें, और खोजी कुत्तों व ड्रोन की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश की जा रही है। 14 राजस्थान राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर हर्षवर्धन की अगुवाई में सेना के जवान मौके पर मोर्चा संभाले हुए हैं।

आईटीबीपी प्रवक्ता कमलेश कुमार ने बताया कि अब तक 100 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें से कई को तत्काल चिकित्सा सुविधा दी गई। उन्होंने कहा, “हमारी हर कोशिश मलबे के नीचे दबी एक-एक जान को बचाने की है।”

बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि मलबे की गहराई 7 से 8 फुट तक है। इसके बावजूद जवानों का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है। मशीनों के साथ-साथ मानवीय संवेदनाएं भी हर कदम पर देखी जा सकती हैं।

इधर मौसम की चुनौती भी बनी हुई है। लगातार बारिश और टूटी सड़कों के कारण राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया है। बीआरओ, एनडीआरएफ, और एसडीआरएफ की टीमें भी जमीनी स्तर पर काम में लगी हैं।

हेलिकॉप्टर सेवाओं के लिए भी तेजी से समन्वय किया जा रहा है। UCADA के दो हेलीकॉप्टर हर्षिल रवाना किए गए हैं, जबकि जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर अतिरिक्त हेलिकॉप्टर स्टैंडबाय पर हैं, ताकि गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाया जा सके।

अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 250 से 300 लोग अब भी लापता हैं। स्थानीय लोग भी अपनों की तलाश में अब उत्तरकाशी की ओर बढ़ रहे हैं। एक नेपाली नागरिक ने Worldnews से बताया कि उसके 25 साथियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है — ये सभी सड़क निर्माण में लगे थे और सेना के बेस कैंप के पास रहते थे।

पूरे इलाके में जमीन से आसमान तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। लक्ष्य सिर्फ एक है — जितना हो सके, उतनी जानें बचाई जाएं।

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