बांग्लादेश एक बार फिर हिंसा की चपेट में है। युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश के कई शहरों में उग्र विरोध और हिंसा भड़क उठी है।
राजधानी ढाका समेत कई इलाकों में अखबारों के दफ्तरों को निशाना बनाया गया, पत्रकारों पर हमले हुए और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। इन हालात ने राष्ट्रीय चुनावों से पहले देश में अस्थिरता की आशंका और बढ़ा दी है।
इंकलाब मंच के प्रवक्ता और आम चुनावों में उम्मीदवार बनने की तैयारी कर रहे शरीफ उस्मान हादी को पिछले शुक्रवार ढाका में चुनाव प्रचार शुरू करते समय नकाबपोश हमलावरों ने सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां छह दिन तक लाइफ सपोर्ट पर रहने के बाद उनकी मौत हो गई।
अखबारों के दफ्तरों पर हमला, आगजनी
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उग्र भीड़ को बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रोथोम अलो और द डेली स्टार के दफ्तरों में तोड़फोड़ करते और आग लगाते देखा गया। बीडी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका के कावरान बाजार स्थित द डेली स्टार के कार्यालय पर आधी रात के आसपास हमला किया गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हमले के दौरान इमारत में फंसे कम से कम 25 पत्रकारों को करीब चार घंटे बाद बाहर निकाला जा सका। आग इतनी तेजी से फैली कि ऑफिस की दो मंजिलें उसकी चपेट में आ गईं और पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया।
पत्रकार बने निशाना
बीडी न्यूज के मुताबिक, सबसे पहले बांग्ला दैनिक प्रोथोम अलो के दफ्तर पर हमला किया गया, जहां भीड़ ने नारेबाजी करते हुए तोड़फोड़ की और फिर आग लगा दी। द डेली स्टार के कार्यालय में भी आगजनी से पहले ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर भारी नुकसान पहुंचाया गया।
मौके से सामने आए वीडियो में वरिष्ठ बांग्लादेशी पत्रकार नुरुल कबीर को भीड़ द्वारा बाल पकड़कर पीटते हुए देखा जा सकता है। रिपोर्टरों ने बताया कि फायर ब्रिगेड की टीमें काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंच सकीं, क्योंकि उग्र भीड़ ने रास्ता रोक दिया था।
अन्य शहरों में भी हिंसा
ढाका के अलावा बंदरगाह शहर चटगांव समेत बांग्लादेश के कई अन्य शहरों से भी हिंसा और आगजनी की खबरें सामने आई हैं। हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका और प्रेस की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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