कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी–लेनिनवादी) लिबरेशन ने ट्रंप प्रशासन के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का कड़ा विरोध करते हुए भारत सरकार से इससे दूरी बनाए रखने की अपील की है।
पार्टी ने इस पहल को औपनिवेशिक सोच का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के अधिकार को कमजोर करने और अमेरिका के नेतृत्व में एक नई औपनिवेशिक व्यवस्था कायम करने की कोशिश है।
पार्टी की केंद्रीय समिति ने कहा कि शर्म अल-शेख समझौते के तहत जिस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की परिकल्पना की गई थी, वह अब अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है। पार्टी के मुताबिक, अब इसे संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिसमें सत्ता का केंद्रीकरण अमेरिका के हाथों में होगा। केंद्रीय समिति ने वेनेजुएला के खिलाफ हालिया अमेरिकी कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्थाओं के संभावित खतरे पहले ही सामने आ चुके हैं।
पार्टी ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2025 में संघर्षविराम की घोषणा के बावजूद गाजा में हिंसा थमी नहीं है। बयान में कहा गया कि इजराइल, अमेरिका और पश्चिमी देशों के समर्थन से वहां लगातार हत्याएं, घरों और बुनियादी ढांचे का विनाश और आम नागरिकों को भूखा रखने की स्थिति बनी हुई है। पार्टी का कहना है कि ऐसे हालात में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन फिलिस्तीनी संघर्ष को कमजोर करने की साजिश के तौर पर देखा जाना चाहिए।
बयान में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत सरकार को आमंत्रित किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी ने भारत से अपनी उपनिवेशवाद विरोधी विरासत और ग्लोबल साउथ के साथ एकजुटता को बनाए रखने की अपील की। पार्टी ने कहा कि भारत को अमेरिका केंद्रित किसी भी नई औपनिवेशिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पार्टी ने आरोप लगाया कि गाजा में जारी हिंसा के दौरान सरकार ने देश की ऐतिहासिक विदेश नीति परंपराओं से समझौता किया है और दमनकारी ताकतों के साथ करीबी रिश्ते बनाए हैं। पार्टी ने इसे शर्मनाक करार दिया।
कम्युनिस्ट पार्टी (एमएल) लिबरेशन ने मांग की कि भारत अपनी नीति में तत्काल बदलाव करे, फिलिस्तीनी जनता के साथ एकजुटता को मजबूत करे और उनके कब्जे, रंगभेद व विदेशी प्रभुत्व से मुक्त होकर अपने भविष्य का फैसला करने के अधिकार का समर्थन करे। पार्टी ने कहा कि फिलिस्तीनी मुक्ति संघर्ष के प्रति भारत का समर्थन अडिग रहना चाहिए।
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