अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के कथित हस्तक्षेप से जुड़े दावों की जांच कर रहा है। इसकी जानकारी व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार, 5 फरवरी को दी।
गौरतलब है कि 2016 का राष्ट्रपति चुनाव जीतकर ही डोनाल्ड ट्रंप पहली बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों को संबोधित करते हुए लेविट ने कहा,
“आप सभी ने कई वर्षों तक यह कहा कि रूस ने डोनाल्ड ट्रंप की मदद करने के लिए 2016 के चुनाव में हस्तक्षेप किया था। अब आपको खुश होना चाहिए कि आखिरकार एक ऐसी सरकार है जो इन दावों की जांच कर रही है।”
रूस के हस्तक्षेप का दावा क्यों?
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गबार्ड ने तर्क दिया है कि 2016 के चुनाव में रूसी हस्तक्षेप से जुड़े आरोप जानबूझकर तैयार किए गए खुफिया आकलनों पर आधारित थे।
दरअसल, उस समय अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने यह निष्कर्ष निकाला था कि रूस ने डोनाल्ड ट्रंप को हिलेरी क्लिंटन पर बढ़त दिलाने के उद्देश्य से चुनाव में हस्तक्षेप किया। हालांकि, तुलसी गबार्ड ने एक खुफिया मेमो का हवाला देते हुए इस दावे को चुनौती दी है।
CIA रिपोर्ट को लेकर विवाद
CNN के मुताबिक, जिस खुफिया दस्तावेज का हवाला गबार्ड दे रही हैं, उसमें केवल यह कहा गया था कि रूस ने चुनावी ढांचे पर साइबर हमले करके वोटों या नतीजों में सीधे बदलाव नहीं किए।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि ओबामा प्रशासन ने कभी यह दावा नहीं किया था कि रूस ने वोटों की गिनती या चुनाव मशीनरी में छेड़छाड़ की।
कांग्रेस रिपोर्ट से टकराव
CNN ने यह भी बताया कि तुलसी गबार्ड के दावे अमेरिकी कांग्रेस की कई जांच रिपोर्टों से मेल नहीं खाते। इनमें तत्कालीन सीनेटर मार्को रुबियो के नेतृत्व वाली सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की 2020 की द्विदलीय रिपोर्ट भी शामिल है।
इस रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया था कि रूस ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए “आक्रामक और बहुआयामी प्रयास” किए थे। रिपोर्ट के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हिलेरी क्लिंटन के चुनावी अभियान को नुकसान पहुंचाने और ट्रंप को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से कार्रवाई का आदेश दिया था।
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