अमेरिका के Los Angeles की एक अदालत में सोशल मीडिया दिग्गजों की भूमिका को लेकर अहम सुनवाई चल रही है।
इस दौरान Meta के CEO Mark Zuckerberg से कड़ी पूछताछ की गई। मामला इस बात की जांच से जुड़ा है कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं।
क्या हैं आरोप?
वादी पक्ष का आरोप है कि मेटा के प्लेटफॉर्म—खासतौर पर Instagram और Facebook—को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे कम उम्र के यूजर्स को लंबे समय तक जोड़े रखें। सुनवाई में यह भी सवाल उठा कि क्या कंपनी को यह जानकारी थी कि बड़ी संख्या में 13 साल से कम उम्र के बच्चे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अदालत में पेश एक आंतरिक दस्तावेज़ के हवाले से दावा किया गया कि 2015 में इंस्टाग्राम पर लाखों ऐसे यूजर्स थे जिनकी उम्र 13 वर्ष से कम थी। वादी पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि छोटे बच्चों से आयु संबंधी नियमों को समझने और सही जानकारी देने की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।
जुकरबर्ग का पक्ष
मार्क जुकरबर्ग ने अदालत में कहा कि कंपनी ने कम उम्र के यूजर्स की पहचान करने और उन्हें हटाने की प्रक्रिया में सुधार किया है। उनका कहना था कि कई यूजर्स अकाउंट बनाते समय अपनी उम्र गलत दर्ज कर देते हैं, जिससे निगरानी जटिल हो जाती है।
एज वेरिफिकेशन को लेकर बार-बार पूछे गए सवालों पर उन्होंने कहा कि कंपनी लगातार नए टूल और तकनीक विकसित कर रही है और इस दिशा में प्रगति हो रही है।
बता दें कि जुकरबर्ग इस मुकदमे में वो गवाह थे जिनपर सबसे अधिक नजर थी. यह उन अदालती केसों की श्रृंखला में पहला ऐसा केस है जो अमेरिकी परिवारों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ दायर किए गए हजारों मुकदमों के लिए कानूनी मिसाल कायम कर सकता था. इस सुनवाई में पहली बार यह देखा गया कि अरबपति मालिक ने सीधे जूरी के सामने और शपथ लेकर अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मौजूद सुरक्षा उपायों की जानकारी दी, उनका बचाव किया.
यह मामला क्यों अहम है?
यह मुकदमा मार्च के अंत तक चल सकता है। जूरी को यह तय करना है कि क्या मेटा और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म एक 20 वर्षीय कैलिफ़ोर्निया निवासी के मानसिक स्वास्थ्य संकट के लिए जिम्मेदार हैं। वादी का दावा है कि उसने बहुत कम उम्र से सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग किया और अब मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद पत्रकारों के अनुसार, शुरुआत में जुकरबर्ग शांत दिखे, लेकिन बाद में सवालों के दौरान उन्होंने झुंझलाहट के संकेत भी दिखाए।
यह केस व्यापक बहस का हिस्सा है, जिसमें यह जांचा जा रहा है कि क्या टेक कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म इस तरह बनाए हैं कि वे बच्चों और किशोरों को अत्यधिक उपयोग की ओर प्रोत्साहित करते हैं। आने वाले हफ्तों में अदालत का फैसला सोशल मीडिया नियमन और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी नीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है।
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