FIR के आदेश के बाद अविमुक्तेश्वरानंद बोले – “मैं केस वापस लेने वालों में से नहीं”

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प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत ने शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati के खिलाफ बटुकों के साथ कथित यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए झूंसी थाने को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।

अदालत ने संबंधित तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार जांच करने को कहा है। इस आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे अदालत के निर्देशों का सम्मान करते हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यक्ति की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि शिकायतकर्ता का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उसका नाम विभिन्न मामलों में दर्ज है। स्वामी ने कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे और किसी भी तरह से मामले को हटवाने या दबाने की कोशिश नहीं करेंगे।

यह आदेश बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत दायर एक आवेदन पर सुनवाई के बाद दिया गया। यह आवेदन आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य की ओर से दाखिल किया गया था। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने साक्ष्यों की समीक्षा और कथित पीड़ितों के बयान दर्ज करने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था, जिसे अब जारी कर दिया गया है।

याचिकाकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 69, 74, 75, 76, 79 और 109 के साथ ही पॉक्सो अधिनियम की धाराएं 3, 5, 9 और 17 के तहत एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया था। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस को विधि अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

अब इस मामले में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू किए जाने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।

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