होर्मुज संकट के बीच भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, केंद्र ने बताई रणनीति

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होर्मुज संकट के बीच भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, सरकार ने बताई समन्वय रणनीति

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और संघर्ष विराम के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं है। इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से जहाजों का आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है, हालांकि इसके बावजूद कुछ पेट्रोलियम उत्पाद लेकर भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से देश तक पहुंचे हैं।

जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर समन्वय किया जाता है, लेकिन सुरक्षा कारणों से कई जानकारियां गोपनीय रखी जाती हैं। मंत्रालय ने शुक्रवार को अंतर-मंत्रालयीय ब्रीफिंग में बताया कि भारत और ईरान के बीच तालमेल कैसे स्थापित किया जाता है, इस पर विस्तार से जानकारी साझा नहीं की जा सकती।

शिपिंग निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस प्रक्रिया में विदेश मंत्रालय की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही की प्राथमिकता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय के समन्वय से तय की जाती है, जिसके बाद जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित निकालने की योजना बनाई जाती है।

अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगभग 13 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं। इनमें एक एलपीजी टैंकर, पांच कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल हैं।

जब डेटा सार्वजनिक होने से जहाजों की सुरक्षा पर असर पड़ने को लेकर सवाल पूछा गया, तो शिपिंग निदेशक ने कहा कि सार्वजनिक डोमेन में मौजूद जानकारी का उपयोग किसी भी तरह से किया जा सकता है, यह पूरी तरह संबंधित पक्ष की मंशा पर निर्भर करता है।

गौरतलब है कि हाल के तनावपूर्ण हालात के बावजूद भारत ने अपने कई जहाजों को इस क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई है। इनमें शिवालिक, नंदा देवी, जग लाडकी, पाइन गैस, जग वसंत, बीडब्लू टायर, बीडब्लू एल्म और ग्रीन सान्वी जैसे जहाज शामिल हैं। अधिकारी इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।

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