पेट्रोल-डीजल के बाद LPG का झटका, कमर्शियल सिलेंडर 53 रुपये तक महंगा

1

पेट्रोल-डीजल के बाद कमर्शियल LPG भी महंगा, दिल्ली में 42 तो कोलकाता में 53.50 रुपये बढ़े दाम

देश में ईंधन कीमतों में बदलाव के बीच सोमवार को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को भी झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरों के मुताबिक दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 42 रुपये महंगा होकर 3,113.50 रुपये का हो गया है, जबकि कोलकाता में इसकी कीमत 53.50 रुपये बढ़कर 3,255.50 रुपये पहुंच गई है।

इसके अलावा 5 किलोग्राम वाले छोटे एफटीएल (Free Trade LPG) सिलेंडर की कीमत में भी 11 रुपये की वृद्धि की गई है। हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

आज से लागू हुई नई दरें

तेल कंपनियों द्वारा जारी संशोधित कीमतें 1 जून से प्रभावी हो गई हैं। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 42 रुपये बढ़ने के बाद 3,113.50 रुपये हो गई है। वहीं 5 किलोग्राम वाले एफटीएल सिलेंडर का दाम 11 रुपये बढ़कर 821.50 रुपये हो गया है।

कोलकाता में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 53.50 रुपये का इजाफा हुआ है, जिसके बाद इसकी नई कीमत 3,255.50 रुपये हो गई है। कमर्शियल एलपीजी का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किया जाता है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का असर बाहर खाने-पीने की लागत पर भी पड़ सकता है।

पेट्रोल, डीजल और ATF पर घटाई गई एक्सपोर्ट ड्यूटी

इसी बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती की घोषणा की है। सरकार ने पेट्रोल पर विंडफॉल गेन टैक्स को घटाकर 1.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं डीजल पर यह टैक्स 13.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 9.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला सड़क एवं अवसंरचना उपकर (Road and Infrastructure Cess) शून्य रहेगा। साथ ही घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा कर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी और ईंधन निर्यात शुल्क में संशोधन ऐसे समय में हुआ है, जब ऊर्जा बाजार वैश्विक कीमतों और मांग-आपूर्ति के दबावों से प्रभावित हो रहा है।

Comments are closed.