होर्मुज संकट के बीच UN का बड़ा रेस्क्यू मिशन, 11 हजार लोगों को निकालने की तैयारी

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अमेरिका-ईरान समझौते के बाद होर्मुज में राहत अभियान, 11 हजार से ज्यादा नाविकों को निकालने में जुटा IMO

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम समझौते के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 11,000 से अधिक नाविकों की सुरक्षित निकासी के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर दिया है। कई महीनों तक समुद्री यातायात प्रभावित रहने के बाद यह कदम क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कई देशों के सहयोग से चल रहा अभियान

आईएमओ के महासचिव Arsenio Dominguez ने बताया कि निकासी अभियान ईरान, ओमान, क्षेत्र के अन्य तटीय देशों, अमेरिका और समुद्री उद्योग के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं और नौवहन संबंधी परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा की गई है।

डोमिंग्वेज के अनुसार, सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी गारंटी हासिल कर ली गई हैं, जिससे प्रभावित नाविकों को चरणबद्ध तरीके से बाहर निकाला जा सके।

संघर्ष के बाद बंद हो गया था अहम समुद्री मार्ग

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और व्यापारिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। 28 फरवरी को क्षेत्रीय संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने इस मार्ग पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे वैश्विक शिपिंग और तेल आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ा। अब युद्धविराम के बाद जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बहाल हो रही है।

होर्मुज के भविष्य को लेकर मतभेद बरकरार

हालांकि समुद्री यातायात फिर से शुरू होने लगा है, लेकिन जलडमरूमध्य के नियंत्रण और प्रशासन को लेकर विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि किसी भी अंतिम समझौते में ईरान को इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या अतिरिक्त शुल्क लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

रुबियो ने कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और किसी भी देश को इसके उपयोग पर शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

ईरान ने दिए अलग संकेत

वहीं ईरान के प्रमुख वार्ताकार और संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf का कहना है कि हालिया घटनाओं के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य कभी भी पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। उनके अनुसार, भविष्य में तनाव और व्यवधान रोकने के लिए नए सुरक्षा और समन्वय तंत्र विकसित करने की आवश्यकता होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी रहने के बावजूद होर्मुज में नियंत्रण, नौवहन अधिकार और संभावित ट्रांजिट शुल्क जैसे मुद्दे आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच प्रमुख विवाद का विषय बने रह सकते हैं।

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