भारत की भीषण गर्मी का पाकिस्तान से क्या कनेक्शन? जानिए पूरी Inside Story

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दिल्ली में क्यों बढ़ रहा है गर्मी का अहसास? पाकिस्तान से आने वाली हवाओं का क्या है रोल

दिल्ली में सोमवार की बारिश के बाद भी मंगलवार को लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार, शहर का वास्तविक तापमान 40-41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, लेकिन नमी के कारण महसूस होने वाला तापमान (Heat Index) शाम के समय 53.5 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे पाकिस्तान से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं तथा अरब सागर से आने वाली नमी वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का मेल बड़ी वजह है।

पाकिस्तान की हवाओं से कैसे बढ़ रही है गर्मी?

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से आने वाली पश्चिमी शुष्क हवाएं दिल्ली का तापमान ऊंचा बनाए रखती हैं। वहीं, अरब सागर से आने वाली नम हवाएं वातावरण में नमी बढ़ा देती हैं।

स्काईमेट के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत के अनुसार, जब गर्म और शुष्क हवाएं नमी वाली हवाओं से मिलती हैं तो बादल तो बनते हैं, लेकिन कई बार पर्याप्त बारिश नहीं हो पाती। इस दौरान हवा में नमी बढ़ने से शरीर से पसीना आसानी से नहीं सूखता और गर्मी वास्तविक तापमान से कहीं अधिक महसूस होती है।

यही वजह है कि तापमान 40 डिग्री के आसपास रहने के बावजूद लोगों को 50 डिग्री से अधिक जैसी गर्मी का अहसास हो सकता है।

दिल्ली में कितना रहा तापमान?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार मंगलवार को विभिन्न मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान इस प्रकार दर्ज किया गया:

  • सफदरजंग: 40.5°C
  • पालम: 41.0°C
  • लोधी रोड: 40.1°C
  • अयानगर: 40.1°C
  • रिज: 41.5°C (सबसे अधिक)

सभी केंद्रों पर तापमान सामान्य से 2 से 4.8 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

मंगलवार को दिल्ली के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश भी दर्ज की गई। सुबह के समय सफदरजंग, पालम, लोधी रोड और अयानगर में बूंदाबांदी हुई, जबकि दिन के दौरान केवल पालम और अयानगर में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई।

यूरोप में क्यों पड़ रही है रिकॉर्डतोड़ गर्मी?

भारत ही नहीं, यूरोप भी इन दिनों भीषण हीटवेव की चपेट में है। मंगलवार को फ्रांस के कई हिस्सों में तापमान 39 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इटली, जर्मनी और ब्रिटेन में भी गर्मी के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है और कई जगह मौतों की खबरें सामने आई हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप में लगातार बढ़ रही चरम गर्मी का प्रमुख कारण मानव-जनित जलवायु परिवर्तन है।

हालिया अध्ययनों के मुताबिक, यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं बढ़ा होता तो दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड जैसी भीषण गर्मी की घटनाएं लगभग 50 वर्षों में एक बार होतीं। लेकिन वैश्विक तापमान में करीब 1.3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के बाद ऐसी हीटवेव अब औसतन हर पांच साल में एक बार देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता वैश्विक तापमान, बदलते मौसम चक्र और वातावरण में बढ़ती नमी भविष्य में भारत और यूरोप दोनों में अधिक तीव्र और बार-बार हीटवेव की घटनाओं को जन्म दे सकते हैं।

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