हिमाचल में बारिश का कहर जारी, पठानकोट-मंडी NH समेत 26 सड़कें बंद; IMD का अलर्ट

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हिमाचल में बारिश और भूस्खलन का कहर, पठानकोट-मंडी NH समेत 26 सड़कें बंद; IMD ने जारी किया अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। बुधवार को मंडी समेत कई जिलों में हुई मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग सहित 26 सड़कें बंद हो गईं। मंडी के पद्धार क्षेत्र में कई घरों में पानी घुस गया, जबकि जलभराव के चलते कई गांवों का संपर्क भी प्रभावित हुआ। मैगल के पास पठानकोट-मंडी हाईवे का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से यातायात बाधित है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले पांच से सात दिनों तक प्रदेश में मानसून के सक्रिय बने रहने का अनुमान जताया है। विभाग के मुताबिक कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर में कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़ और नदियों-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी का खतरा बना हुआ है।

अगले 24 घंटे अहम

IMD के हिमाचल केंद्र के प्रमुख शोभित कटियार ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान लगभग पूरे राज्य में बारिश दर्ज की गई। मंडी और हमीरपुर के कुछ इलाकों में भारी वर्षा हुई, जबकि शिमला समेत अन्य जिलों में मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों तक कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर में मानसून सबसे अधिक सक्रिय रहेगा और लगभग रोज कहीं न कहीं भारी बारिश की संभावना है।

भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा

कटियार ने चेतावनी दी कि लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और नदियों-नालों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो सकती है। पहाड़ी सड़कों पर फिसलन और कई जगहों पर दृश्यता कम रहने की आशंका है। इसके अलावा कृषि और बागवानी फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सिरमौर, शिमला, कुल्लू, मंडी और कांगड़ा जिलों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की गई है।

13-14 जुलाई तक सक्रिय रहेगा मानसून

IMD के अनुसार 13-14 जुलाई तक मध्य और निचले पहाड़ी इलाकों में मानसून मजबूत बना रहेगा। 16 से 22 जुलाई के बीच मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में अच्छी बारिश जारी रहने की संभावना है, जबकि निचले इलाकों में इसकी तीव्रता कुछ कम हो सकती है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में मानसून की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखें, भारी बारिश के दौरान भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।

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