नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड से तबाही और बढ़ गई है।
हादसे में मौतों का आंकड़ा करीब 160 पहुंच गया है, जबकि लगभग 750 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में करीब 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर हादसे पर दुख जताया और हरसंभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया। भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने और एनडीआरएफ टीमों की तैनाती की तैयारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश ने 1070 हेल्पलाइन सक्रिय की है, जबकि भारतीय दूतावास और महाराष्ट्र सरकार ने भी प्रभावित भारतीयों की मदद के लिए हेल्पलाइन और सूचना तंत्र शुरू किए हैं।
भूकंप के बाद अचानक आई बाढ़
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया और करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के मुताबिक, बाढ़ से कुछ मिनट पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, लेंडे नदी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आई। इसके बाद भोटेकोशी नदी में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया, जिसने रसुवा और धादिंग समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई।
बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी तक पहुंचा और नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी तक कई इलाके प्रभावित हुए। कई पुल, सड़कें और इमारतें बह गईं। रसुवा में नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है।
सेना और पुलिस ने संभाला मोर्चा
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया है। नेपाली सेना ने 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं और विभिन्न स्थानों से 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है।
रसुवा के स्याफ्रूबेसी और तिमुरे जैसे प्रभावित इलाकों में खराब परिस्थितियों के कारण बचाव हेलीकॉप्टरों को उतरने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। त्रिशूली में सेना ने चिकित्सा केंद्र स्थापित किया है और जिला अस्पताल की सहायता के लिए एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी भेजा गया है।
हालांकि, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में खतरा अभी टला नहीं है। अधिकारियों ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
133 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता
नेपाल के गृह मंत्रालय के मुताबिक, लापता लोगों में करीब 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय शामिल हैं। इनमें तमिलनाडु के 37 लोग बताए जा रहे हैं। कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर थे।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, लापता लोगों में अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड समेत कई देशों के नागरिक भी शामिल हैं। ईशा फाउंडेशन ने भी अपने केंद्र से जुड़े 77 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है, जबकि 495 लोगों के सुरक्षित लौटने की बात कही है।
जलविद्युत परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा में आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रभावित परियोजनाओं में रसुवागढ़ी, संजेन खोला और अपर त्रिशूली-3ए शामिल हैं।
नेपाल सरकार के अनुसार, बाढ़ में 19 मोटर योग्य पुल बह गए हैं। कई सड़कें और संचार संपर्क भी टूट गए हैं, जिससे राहत एवं बचाव अभियान प्रभावित हो रहा है।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी तबाही
बाढ़ का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पड़ा है। गिरोंग काउंटी स्थित गिरोंग बंदरगाह प्रभावित हुआ है, जबकि शिगात्से क्षेत्र में सड़क, संचार और बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। चीन ने बचाव अभियान के लिए सैकड़ों कर्मियों और वाहनों को तैनात किया है।
लगातार बारिश के कारण जलस्तर फिर बढ़ने की आशंका जताई गई है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों की तलाश और राहत अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं।
सोशल मीडिया पर तबाही के वीडियो
बाढ़ के बाद सामने आए वीडियो में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे स्थित इलाकों में भारी तबाही दिखाई दे रही है। कई जगह तेज बहाव में वाहन, पुल और इमारतें बहती नजर आईं। रसुवागढ़ी में बाढ़ का पानी कुछ ही समय में बड़े इलाके को मलबे में बदलता दिखाई दिया।
नेपाल में पिछले साल भी भोटेकोशी नदी में दो बार विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसमें रसुवा में भारी नुकसान हुआ था और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।
भारत में भी अलर्ट
नेपाल में आई बाढ़ के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। दोनों राज्यों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
आपातकालीन नंबर:
नेपाल में भारतीय दूतावास: +977 985 131 6807, +977 970 910 7500
बीजिंग में भारतीय दूतावास: 0086 185 1428 4905
नेपाल पर्यटन बोर्ड: 1234 (टोल-फ्री), 1144 (हॉटलाइन)
पर्यटन पुलिस: 9851289445
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