नेपाल आपदा: हाइडिल सुरंगों में फंसे 121 कर्मियों को बचाने की जद्दोजहद जारी, पाइप से पहुंचाई जा रही ऑक्सीजन

3

नेपाल में भयावह बाढ़ और भूस्खलन के 14 दिन बाद भी राहत एवं बचाव अभियान जारी है।

अब बचाव दलों का मुख्य फोकस तीन हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे दर्जनों कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। अधिकारियों के अनुसार, भूमिगत सुरंगों में करीब 121 कर्मियों के फंसे होने की आशंका है। उन्हें जिंदा रखने के लिए पाइप के जरिए लगातार ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है।

रायटर के मुताबिक, बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के नौ जिलों में 11 हाइड्रोपावर परियोजनाओं को प्रभावित किया है। इनमें रसुवा जिले की अपर त्रिशूली परियोजना 3ए और 3बी भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मियों को बाहर निकालना बचाव अभियान की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

आपदा के दो सप्ताह बाद भी नेपाल में तबाही का सिलसिला थमा नहीं है। अब तक 1,357 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 5,326 लोग अब भी लापता हैं। राहत एवं बचाव दलों ने 13,583 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। सबसे अधिक 363 शव चितवन जिले से बरामद हुए हैं। वहीं, तिब्बत क्षेत्र में बाढ़ के मलबे से 43 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि करीब 500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

169 भारतीय सुरक्षित निकाले गए

प्रेट्र के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में आपदा के दौरान फंसे 169 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हालांकि, 275 भारतीय अब भी लापता हैं। इनमें तिब्बत क्षेत्र में लापता 49 भारतीय भी शामिल हैं।

जायसवाल ने बताया कि भारत, चीन और नेपाल में स्थापित कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहे हैं। भारत नेपाल को मानवीय सहायता पहुंचाना जारी रखेगा। अब तक सात विमानों के जरिए 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है।

आपदा में मारे गए लोगों की पहचान के लिए भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी काम कर रही है। जायसवाल के मुताबिक, अब तक 1,200 डीएनए नमूने काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में जमा किए जा चुके हैं।

सड़क और पुल संपर्क बहाल करना बड़ी चुनौती

आईएएनएस के अनुसार, बाढ़ ने नेपाल के सड़क और पुल नेटवर्क को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। रसुवा और चितवन में 41 पुल बह गए, जबकि चार अन्य पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई सड़कें भी बाढ़ में बह गई हैं। इनके पुनर्निर्माण पर करीब 50 अरब नेपाली रुपये खर्च होने का अनुमान है।

सड़क विभाग के मुताबिक, अब तक 48 मीटर लंबे 11 बेली ब्रिज लगाए जा चुके हैं। चीन की मदद से भी दो बेली ब्रिज स्थापित किए गए हैं। भारत ने भी नेपाल को बेली ब्रिज उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, प्रभावित इलाकों से सड़क संपर्क टूटने के कारण इन पुलों को मौके तक पहुंचाना ही एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Comments are closed.