हूती विद्रोहियों का दोहरा मोर्चा: सऊदी अरब पर हमले जारी, अब यमन के तैज शहर पर भी किया हमला

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सऊदी अरब पर मिसाइल हमलों के बीच तैज पर हूतियों की घेराबंदी, हवाई सेवाएं ठप होने से बढ़ा संकट

सऊदी अरब और यमन में हूती विद्रोहियों के हमले तेज होने से क्षेत्रीय संकट गहराता जा रहा है। मंगलवार को हूती लड़ाकों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बार फिर मिसाइल हमला करने का दावा किया। इसके अलावा खामिस मुशैत स्थित सऊदी वायुसेना अड्डे और सीमावर्ती शहरों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। दूसरी ओर, यमन के तीसरे सबसे बड़े शहर तैज पर हूती लड़ाकों की घेराबंदी बढ़ने से वहां मानवीय संकट गहराने की आशंका है।

रियाद हवाई अड्डे पर विमानों की आवाजाही बंद होने के कारण हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालांकि, सऊदी अरब ने कथित मिसाइल हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस बीच, ईरान ने हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच वार्ता कराने का प्रस्ताव रखा है।

रियाद और जेद्दा एयरपोर्ट पर उड़ानें प्रभावित

रिपोर्टों के अनुसार, रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एक सप्ताह के भीतर छह हवाई हमलों का सामना कर चुका है। सुरक्षा कारणों से हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ है और 18 अक्टूबर तक सेवाएं बंद रहने की आशंका जताई गई है। शनिवार को हुए हमले में 13 यात्रियों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर के बाद हवाई अड्डे को बंद करने का निर्णय लिया गया था।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के दूसरे सबसे व्यस्त जेद्दा हवाई अड्डे पर भी सुरक्षा कारणों से अधिकांश उड़ान सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। भारतीय विमानन कंपनियों एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर समेत अन्य कंपनियों ने 17 अक्टूबर तक सऊदी अरब के लिए अपनी सेवाएं रोकने का फैसला किया है।

अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों पर भी इसका असर पड़ा है। मंगलवार को एतिहाद एयरवेज और कतर एयरवेज भी उड़ानें निलंबित करने वाली कंपनियों में शामिल हो गईं। वहीं, एयर फ्रांस-केएलएम समेत कुछ अन्य विमानन कंपनियों ने अक्टूबर के अंत तक सेवाएं रोकने के संकेत दिए हैं।

लगातार उड़ानें रद्द होने से सऊदी अरब के विमानन क्षेत्र और पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचने की आशंका है। हाल के वर्षों में पर्यटन और हवाई परिवहन के बुनियादी ढांचे पर किए गए निवेश पर भी इसका असर पड़ सकता है।

यमन के तैज शहर पर बढ़ता हूती दबाव

सऊदी अरब पर हमलों के साथ हूती विद्रोही यमन में सरकारी सेना के खिलाफ भी भीषण जमीनी लड़ाई लड़ रहे हैं। यमन की सरकारी सेना अपने नियंत्रण से बाहर हुए इलाकों को वापस लेने का अभियान चला रही है, लेकिन तैज शहर की सुरक्षा उसके लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, हूती लड़ाके तैज की घेराबंदी तेज कर रहे हैं। इससे शहर का अन्य इलाकों से संपर्क कटने का खतरा बढ़ गया है। करीब दस लाख की आबादी वाले इस शहर के लोगों में भय का माहौल है। पहाड़ियों से घिरे तैज से संघर्ष के बीच बाहर निकलना भी मुश्किल होता जा रहा है।

गृहयुद्ध की पुरानी यादों से सहमे लोग

यमन करीब 15 वर्षों से गृहयुद्ध और अस्थिरता का सामना कर रहा है। तैज के निवासियों को वर्ष 2014 में भी लंबे समय तक घेराबंदी और जरूरी वस्तुओं की कमी जैसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा था। अब एक बार फिर वैसी स्थिति पैदा होने की आशंका से लोगों ने खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं का भंडारण शुरू कर दिया है।

यदि शहर की घेराबंदी और कड़ी होती है, तो भोजन, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे बड़ी आबादी के सामने मानवीय संकट खड़ा होने का खतरा है।

इस बीच, ईरान की ओर से हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच वार्ता का प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब हवाई हमलों और यमन में जमीनी संघर्ष ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। वार्ता की पहल का परिणाम क्या होगा, यह आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

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