मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले की आशंका, तेहरान ने दी ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ इस्तेमाल करने की धमकी
मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर नए हमले की तैयारी? अमेरिका-इजरायल की रणनीति पर रिपोर्ट, तेहरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर सख्त बयानबाजी के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर नए सैन्य हमलों की योजना पर विचार कर रहे हैं। इसके जवाब में तेहरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ नामक हथियार के इस्तेमाल की चेतावनी दी है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित सैन्य अभियान सीमित अवधि का, लेकिन तीव्र हो सकता है। इसमें ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे, परमाणु ठिकानों और मिसाइलों व ड्रोन के भंडार को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक किसी नए अभियान को मंजूरी नहीं दी है।
ईरान के खिलाफ सैन्य तैयारियां तेज होने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। इनमें इराक के ऊपर उड़ानें और अन्य सैन्य अभ्यास शामिल बताए गए हैं। अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने इस सप्ताह इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की, जहां संभावित सैन्य कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि नए हमले ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकते हैं और उसे परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य मुद्दों पर कूटनीतिक रियायतें देने के लिए मजबूर कर सकते हैं। हालांकि, इस रणनीति पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।
व्हाइट हाउस ने सैन्य योजनाओं पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। उसका कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सभी विकल्प खुले रखे हुए हैं।
ईरान की चेतावनी: ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ का देंगे जवाब
संभावित हमलों की खबरों के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ है, जबकि ईरान उसे ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ दिखाएगा।
मोहेब्बी ने इस कथित हथियार की तकनीकी जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने यह भी दावा किया कि जून 2025 में हुए 12 दिवसीय ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद ईरान के मिसाइल भंडार में डेढ़ गुना वृद्धि हुई है। उनके मुताबिक, मिसाइलों की गुणवत्ता, मारक क्षमता, रेंज और सटीकता में भी सुधार किया गया है।
ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि देश अब अपनी रक्षा रणनीति में स्थायी प्रतिरोध और असममित युद्ध पर अधिक जोर दे रहा है। उनके अनुसार, भविष्य में हमला होने पर ईरान केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आक्रामक कदम भी उठा सकता है।
क्या ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों पर गिर सकता है MOAB?
रिपोर्ट में अमेरिकी बम GBU-43/B, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (MOAB) कहा जाता है, के संभावित इस्तेमाल का भी जिक्र है। इस हथियार का वजन करीब 9,800 किलोग्राम है और यह अमेरिका के सबसे बड़े गैर-परमाणु बमों में शामिल है।
ईरान की गहरी भूमिगत परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए इस तरह के हथियार के इस्तेमाल पर विचार किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, MOAB मुख्य रूप से जमीन के ऊपर विस्फोट करने वाला हथियार है। इसलिए मजबूत चट्टानों के नीचे बनी गहरी भूमिगत सुविधाओं को नष्ट करने में इसकी क्षमता सीमित हो सकती है।
अमेरिकी सैन्य तैनाती और कूटनीतिक दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका नवंबर की शुरुआत तक क्षेत्र में तीन एयरक्राफ्ट कैरियर, हजारों मरीन सैनिकों, लड़ाकू विमानों और विशेष बलों की तैनाती पूरी करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले ट्रंप ने मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करने का वादा किया था। ऐसे में चुनाव के बाद की संभावित रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं।
अमेरिका सैन्य दबाव के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर बातचीत में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। दूसरी ओर, ईरानी वार्ताकार परमाणु मुद्दे पर रियायत देने के लिए तैयार नहीं बताए जा रहे हैं।
ऊर्जा ठिकानों से आगे फैल सकता है संघर्ष
ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि नया युद्ध शुरू होता है, तो उसका असर केवल समुद्री परिवहन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रहेगा। डेटा सेंटर और समुद्र के भीतर बिछी इंटरनेट केबल भी संभावित संघर्ष के दायरे में आ सकती हैं।
फिलहाल अमेरिका और इजरायल की ओर से किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सैन्य कार्रवाई की संभावना, उसका समय और लक्ष्य अनिश्चित बने हुए हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की बयानबाजी और सैन्य तैयारियों से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
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