मैक्सिको की सेना ने देश के सबसे वांछित ड्रग सरगनाओं में शामिल Nemesio Oseguera Cervantes उर्फ ‘एल मेंचो’ को एक विशेष ऑपरेशन में मार गिराने का दावा किया है।
22 फरवरी को की गई आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, जलिस्को राज्य के तपलपा शहर में मुठभेड़ के दौरान उसे गोली लगी। सेना के अनुसार 59 वर्षीय एल मेंचो को एयरलिफ्ट कर मेक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। इस कार्रवाई के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा और तनाव की खबरें सामने आई हैं।
अमेरिका ने जलिस्को कार्टेल को आतंकवादी संगठन घोषित किया है और उस पर आरोप लगाया है कि वह कोकीन, हेरोइन, मेथामफेटामिन और फेंटानिल जैसी ड्रग्स अमेरिका भेजता है.
कौन था ‘एल मेंचो’?
एल मेंचो कुख्यात ड्रग कार्टेल Jalisco New Generation Cartel (CJNG) का प्रमुख था। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार 2009 में उभरा यह संगठन तेजी से मैक्सिको के सबसे हिंसक और प्रभावशाली ड्रग तस्करी नेटवर्क में शामिल हो गया। अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) इसे Sinaloa Cartel का बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता रहा है।
एल मेंचो पर मैक्सिकन सुरक्षा बलों और सरकारी अधिकारियों पर हमलों की साजिश रचने के आरोप भी लगे थे। उसका नेटवर्क कोकीन, मेथामफेटामिन और खास तौर पर फेंटेनाइल की तस्करी के लिए कुख्यात था।
1.5 करोड़ डॉलर का इनाम
अमेरिकी विदेश विभाग ने एल मेंचो की गिरफ्तारी या ठोस जानकारी देने वाले को 1.5 करोड़ डॉलर (करीब 136 करोड़ रुपये) तक का इनाम घोषित किया था। जून 2025 में जारी अमेरिकी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2024 से अब तक हजारों किलोग्राम फेंटेनाइल जब्त की गई, जिनमें से अधिकांश खेप मैक्सिको सीमा के पास पकड़ी गई थी।
अमेरिका–मैक्सिको तनाव के बीच कार्रवाई
यह ऑपरेशन ऐसे समय में हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump मैक्सिको पर फेंटेनाइल और अन्य ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए कड़ा दबाव बना रहे थे। उन्होंने मैक्सिको से आयात पर टैरिफ लगाने की चेतावनी भी दी थी। वहीं, मैक्सिको की राष्ट्रपति Claudia Sheinbaum पर ड्रग नेटवर्क पर पर्याप्त कार्रवाई न करने के आरोप लगते रहे हैं।
इससे पहले Joaquín Guzmán उर्फ ‘एल चापो’ और Ismael Zambada जैसे बड़े कार्टेल सरगनाओं की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो फिलहाल अमेरिका में सजा काट रहे हैं।
एल मेंचो की मौत को मैक्सिको के ड्रग युद्ध में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हिंसा और सत्ता संघर्ष की नई लहर भी शुरू हो सकती है।
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