Hormuz Tension: आमने-सामने टकराव की स्थिति, अमेरिका ने भेजे 3 युद्धपोत और सैनिक

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाते हुए तीन अतिरिक्त युद्धपोत और करीब 2,500 मरीन तैनात किए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव के मद्देनज़र उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, USS Boxer समेत तीन अम्फिबियस असॉल्ट शिप और 11वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के जवान सैन डिएगो से रवाना हो चुके हैं। इनकी तैनाती मिडिल ईस्ट में की जा रही है, हालांकि सुरक्षा कारणों से सटीक लोकेशन का खुलासा नहीं किया गया है।

ईरान की चेतावनी तेज
तेहरान की ओर से भी बयानबाजी तेज हो गई है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य प्रवक्ता अबोलफज़्ल शेकरची ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में पर्यटन और मनोरंजन स्थल भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब हालिया हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत की खबरें सामने आई हैं।

ईरान का दावा है कि वह लगातार मिसाइल क्षमता बढ़ा रहा है, हालांकि उसके कुछ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबरों ने हालात को और जटिल बना दिया है।

नेतृत्व में बदलाव और सख्त रुख
इजरायली हमलों में अली ख़ामेनेई की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई ने पद संभाल लिया है। अपने पहले बयान में उन्होंने साफ कहा कि दुश्मनों की सुरक्षा छीन ली जाएगी, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

खाड़ी देशों में हमले तेज
बीते कुछ दिनों में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमले से आग लग गई, जबकि बहरीन और सऊदी अरब में भी हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
दुबई में एयर डिफेंस सिस्टम ने कई हमलों को नाकाम किया।

सीधा टकराव और दावे-प्रतिदावे
इजरायल लगातार तेहरान पर हमले कर रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है, हालांकि ईरान ने इन दावों को खारिज किया है।

मानवीय संकट गहराया
लगातार हमलों के चलते हालात मानवीय संकट में बदलते जा रहे हैं। ईरान में अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। इजरायल में भी हमलों में कई लोगों की जान गई है।

वैश्विक असर और तेल संकट
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
इसका असर एशियाई देशों—खासतौर पर भारत, चीन और जापान—पर देखने को मिल रहा है। साथ ही हीलियम और सल्फर जैसी जरूरी आपूर्ति भी बाधित हो रही है, जिससे टेक और कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ रहा है।

अमेरिका का NATO पर निशाना
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने NATO देशों पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘कमजोर’ बताया है। उन्होंने कहा कि सहयोगी देश इस संकट में खुलकर अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं।

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं और वैश्विक स्तर पर इसके गंभीर प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।

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