सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में बिना फायर एनओसी और स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के संचालित हो रहे पेइंग गेस्ट (PG) के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की संभावना है।
दिल्ली हाई कोर्ट की सख्ती के बीच ऐसे PG में रहने वाले हजारों छात्रों और कामकाजी लोगों के सामने आवास को लेकर नई परेशानी खड़ी हो सकती है।
नगर निगम की ओर से हाई कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 2,453 PG का सर्वे किया गया। इनमें से केवल 730 इमारतों के बिल्डिंग प्लान का रिकॉर्ड उपलब्ध मिला। यानी 1,723 संपत्तियों के बिल्डिंग प्लान या तो रिकॉर्ड में नहीं मिले या वे वैध नहीं पाए गए।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद संबंधित संपत्तियों पर सीलिंग या तोड़फोड़ जैसी कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने छात्रों और अन्य निवासियों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया है। ऐसे में बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के संचालित PG की सुरक्षा और नियमों के अनुपालन पर सवाल उठ रहे हैं।
MCD की निर्माण समिति के पूर्व चेयरमैन जगदीश ममगांई के मुताबिक, आने वाले समय में नगर निगम को संबंधित इमारतों के बिल्डिंग प्लान अदालत के सामने प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। उनका कहना है कि किसी भवन की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन बिल्डिंग प्लान या विस्तृत स्ट्रक्चरल सेफ्टी जांच के जरिए किया जा सकता है। ऐसे में जिन इमारतों का कोई स्वीकृत प्लान उपलब्ध नहीं है, उनकी सुरक्षा का आकलन चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
ममगांई ने सरकार से मांग की है कि छात्रों और कामकाजी लोगों की जरूरतों को देखते हुए सरकारी स्तर पर PG और हॉस्टल की सुविधाओं का विस्तार किया जाए, ताकि नियमों के उल्लंघन वाले आवासीय विकल्पों पर निर्भरता कम हो सके।
क्या होता है बिल्डिंग प्लान?
MCD के संदर्भ में बिल्डिंग प्लान किसी इमारत का स्वीकृत नक्शा होता है। इसमें भवन के निर्माण, लेआउट और निर्धारित सुरक्षा एवं निर्माण मानकों के अनुपालन से जुड़ी जानकारी होती है। दिल्ली के कई अनियोजित और पुराने इलाकों में भवनों के नक्शे से जुड़े रिकॉर्ड अलग-अलग स्थिति में हो सकते हैं, जिसके कारण कई संपत्तियों के लिए स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध नहीं होता।
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