ईरान और कुवैत के बीच तनाव उस समय बढ़ गया जब ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने फारस की खाड़ी में एक ईरानी नाव पर कथित हमले और चार ईरानी नागरिकों की हिरासत को लेकर कुवैत की तीखी आलोचना की।
उन्होंने नागरिकों की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि ईरान अपने जवाबी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि कुवैत ने “फूट डालने की स्पष्ट कोशिश” के तहत ईरानी नाव पर गैर-कानूनी कार्रवाई की। उन्होंने दावा किया कि यह घटना उस द्वीप के पास हुई, जिसका इस्तेमाल अमेरिका कथित तौर पर ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियों के लिए करता है।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान विरोधी अभियानों के लिए किया जाता है। इसी बीच ईरान ने कुवैत को चेतावनी दी है कि यदि वह भविष्य में संभावित जवाबी कार्रवाइयों से बचना चाहता है, तो उसे अपने क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म करनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बेंजामिन नेतन्याहू के संयुक्त अरब अमीरात दौरे को लेकर भी नए दावे सामने आए। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के दौरान नेतन्याहू ने UAE का दौरा किया था, हालांकि संयुक्त अरब अमीरात ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
वहीं, यमन के उप विदेश मंत्री ने ईरान के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों से पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। उन्होंने इस मुद्दे पर इस्लामी देशों से एकजुट होने की अपील भी की।
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