निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम, तीन महीने की फीस एकमुश्त मांगना पड़ेगा भारी

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दिल्ली में निजी स्कूलों द्वारा फीस वसूली को लेकर जारी मनमानी पर अब शिक्षा निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाया है।

नए आदेश के तहत किसी भी स्कूल को अभिभावकों से एक बार में एक महीने से अधिक की फीस जमा कराने के लिए मजबूर करने की अनुमति नहीं होगी। निदेशालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्कूल की मान्यता रद्द करना या जरूरत पड़ने पर उसका प्रबंधन अपने हाथ में लेना भी शामिल हो सकता है।

अभिभावकों पर बढ़ते बोझ पर सख्ती

शिक्षा विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल अभिभावकों से दो महीने या तिमाही आधार पर फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं। विभाग ने माना कि इस तरह की प्रथा खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है और इसे रोकना जरूरी है।

एडवांस फीस पर रोक

आदेश के अनुसार, अब स्कूल एडमिशन के समय या पढ़ाई जारी रखने, सुविधा शुल्क या किसी अन्य बहाने से अग्रिम फीस देने के लिए अभिभावकों को बाध्य नहीं कर सकेंगे।

स्वेच्छा से भुगतान की छूट

हालांकि, यदि कोई अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार एक से अधिक महीनों की फीस एक साथ जमा करना चाहता है, तो स्कूल उसे रोक नहीं सकता। लेकिन इसके लिए किसी भी प्रकार का दबाव या शर्त नहीं लगाई जा सकती।

पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश

यह कदम पहले से लागू दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। Delhi High Court order on school fees 2019 के आधार पर वर्ष 2019 में भी मासिक फीस प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई स्कूल अब तक इसका पालन नहीं कर रहे थे।

स्कूलों के लिए अनिवार्य निर्देश

निदेशालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश को सात कार्यदिवस के भीतर अपने नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करें और अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करें, ताकि अभिभावकों को इसकी पूरी जानकारी मिल सके।

अगर चाहें तो मैं इसे और ज्यादा “न्यूज़ बुलेटिन” या “संक्षिप्त ब्रेकिंग” फॉर्मेट में भी बदल सकता हूँ।

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